Flat Buying Tips and Calculation: दिल्ली के शाहदरा की तंग गलियों में एक छोटे से किराये के मकान में रहने वाले प्रकाश शर्मा का बरसों पुराना सपना आखिरकार पूरा हो गया. उन्होंने NCR के राजेंद्रनगर में अपना खुद का मकान ले लिया. प्रकाश पिछले कई वर्षों से आनंद विहार स्थित एक प्रतिष्ठित प्राइवेट कंपनी में कार्यरत हैं. हर महीने उनके बैंक खाते में करीब 70,000 रुपये की सैलरी क्रेडिट होती है. मिडिल क्लास फैमिली वाले प्रकाश के लिए दिल्ली-NCR में अपना घर लेना किसी हिमालय फतह करने जैसा था, लेकिन आज वे 40 लाख रुपये के फ्लैट के मालिक हैं.
प्रकाश ने किसी जल्दबाजी में नहीं, बल्कि बिल्डर्स के साथ लंबी बातचीत और अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की सटीक वित्तीय सलाह के बाद यह कदम उठाया. आज वे न केवल अपनी EMI समय पर चुका पा रहे हैं, बल्कि घर की बाकी जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई और छोटी-मोटी बचत भी बिना किसी मानसिक तनाव के पूरी कर पा रहे हैं.
अगर आप भी प्रकाश की तरह किराये के चंगुल से निकलकर अपने घर की चाबी हासिल करना चाहते हैं, तो ये 'कैलकुलेशन' आपके बहुत काम आने वाला है.
कैसे शुरू करें? EMI और सैलरी का सही संतुलन
दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं, लेकिन प्रकाश की कहानी साबित करती है कि 70 हजार रुपये की सैलरी में 40 लाख तक का घर खरीदना मुमकिन है. वित्तीय विशेषज्ञ और 'प्रॉपर्टी मास्टर' के एमडी गोल्डी अरोड़ा के अनुसार, '70 हजार की सैलरी में घर खरीदना संभव है, लेकिन इसमें अनुशासन जरूरी है. खरीदार को अपनी EMI को सैलरी के 35 से 40 फीसदी के भीतर रखना चाहिए.'
प्रकाश के मामले में, उनका गणित कुछ ऐसा था:
- सैलरी: 70,000 रुपये
- EMI का बजट: 25,000 से 28,000 रुपये (सैलरी का लगभग 35-40%)
- लोन की अवधि: 20 साल
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर आप 9 से 10 फीसदी ब्याज दर पर 20 साल के लिए लोन लेते हैं, तो इस बजट में आपको 28 से 32 लाख रुपये तक का होम लोन आसानी से मिल सकता है.
डाउन पेमेंट: बचत का सही इस्तेमाल
बैंक आमतौर पर प्रॉपर्टी की कुल कीमत का 75 से 80 फीसदी ही लोन देते हैं. प्रकाश ने 40 लाख के फ्लैट के लिए पहले से ही करीब 8 लाख रुपये बचाकर रखे थे, जो डाउन पेमेंट के काम आए. विशेषज्ञों की सलाह है कि जितना ज्यादा डाउन पेमेंट होगा, EMI का बोझ उतना ही कम होगा.
हालांकि, कुशाग्र अंसल (डायरेक्टर, अंसल हाउसिंग) कहते हैं कि पूरी बचत डाउन पेमेंट में नहीं लगानी चाहिए; इमरजेंसी के लिए फंड रखना भी उतना ही जरूरी है. वो कहते हैं कि 70 हजार की सैलरी में घर खरीदना संभव है, लेकिन इसमें अनुशासन बहुत जरूरी है. अपनी EMI को सैलरी के 35 से 40 फीसदी के भीतर रखना चाहिए और अनावश्यक खर्चों से बचना चाहिए. शुरुआत में छोटा और किफायती घर लेना ज्यादा समझदारी है, क्योंकि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, भविष्य में अपग्रेड करने के विकल्प भी खुले रहते हैं.
एक्सपर्ट्स मंत्र
- सख्त अनुशासन: फालतू खर्चों में कटौती करें.
- इमरजेंसी फंड: कम से कम 6 महीने की EMI के बराबर पैसा अलग रखें.
- छोटा कदम: शुरुआत में किफायती 1BHK या कॉम्पैक्ट 2BHK लें, जिसे बाद में आय बढ़ने पर अपग्रेड किया जा सके.
NCR में कहां मिलेंगे 30 से 40 लाख के घर?
दिल्ली या गुरुग्राम के पॉश इलाकों में इस बजट में घर मिलना मुश्किल है, लेकिन प्रकाश ने अपनी लोकेशन का चयन समझदारी से किया. NCR के कुछ उभरते इलाके आज भी किफायती विकल्प देते हैं:
- दिल्ली के इलाके: उत्तम नगर, भजनपुरा, बुरारी, मोहन गार्डन और जामिया नगर में 2BHK फ्लैट इस बजट में मिल सकते हैं.
- NCR के हॉटस्पॉट: ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन), गाजियाबाद का राजनगर एक्सटेंशन, वेव सिटी और सोहना (साउथ गुरुग्राम).
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के पास कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जहां इस बजट में 1BHK और कॉम्पैक्ट 2BHK फ्लैट मिल सकते हैं. इन इलाकों में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बेहतर हो रहा है, जिससे भविष्य में प्रॉपर्टी कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी बनी रहती है.
छिपे हुए खर्च: सिर्फ फ्लैट की कीमत ही काफी नहीं
प्रकाश ने अपने बजट में हिडन चार्जेज को भी शामिल किया था, जिसे अक्सर लोग भूल जाते हैं. दिल्ली-NCR में आपको इन खर्चों के लिए तैयार रहना चाहिए:
- रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प ड्यूटी: प्रॉपर्टी की कीमत का करीब 6 से 8 फीसदी (40 लाख पर करीब 2.5 से 3 लाख रुपये).
- अन्य शुल्क: मेंटेनेंस, क्लब मेंबरशिप, बिजली फिटिंग और बेसिक इंटीरियर पर 2 से 3 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है.
कुल मिलाकर, घर लेने के बाद आपके पास 4 से 5 लाख रुपये का अतिरिक्त बैकअप होना चाहिए.
एक्सपर्ट ने बताया- किन बातों का रखें ध्यान
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन, हरविंदर सिंह सिक्का कहते हैं कि आज का खरीदार जागरूक है और वह केवल कीमत नहीं, बल्कि लोकेशन और भविष्य की ग्रोथ देख रहा है. किफायती और मिड-सेगमेंट हाउसिंग की मांग इसी वजह से बढ़ रही है. वे कहते हैं कि लोकेशन, कनेक्टिविटी और भविष्य की ग्रोथ को ध्यान में रखकर निर्णय ले रहा है. यही कारण है कि किफायती और मिड-सेगमेंट हाउसिंग की मांग लगातार बनी हुई है.
किराये पर रहने के बजाय अपनी खुद की प्रॉपर्टी के लिए EMI देना एक स्मार्ट निवेश है. अगर आपकी सैलरी भी 70,000 रुपये के आसपास है, तो सही प्लानिंग और अनुशासन के साथ आप भी अपने घर का सपना सच कर सकते हैं. जैसा कि प्रकाश और उनके जैसे हजारों युवा कर पा रहे हैं- नामुमकिन कुछ भी नहीं, बस गणित सही होना चाहिए.
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