सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है. ऐसे में अगर आप निवेशक हैं और खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो आपके लिए ये अच्छी खबर है. वहीं दूसरी तरफ आपका प्लान मुनाफावसूली का है तो अभी आपको इंतजार करना होगा. ग्लोबल मार्केट में उठा-पटक और मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान टेंशन का असर बुलियन मार्केट पर साफ दिखाई दे रहा है. एमसीक्स पर सोने और चांदी दोनों ही हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को धराशाई हो गए.
MCX के साथ लोकल मार्केट में सोना-चांदी हुए धराशाई
एमसीएक्स पर सोने की बात करें तो शुक्रवार को 3,947 रुपये सस्ता होकर 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. वहीं चांदी सोने के मुकाबले ज्यादा टूटी. 16,595 रुपये गिरकर 2,48,201 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. चांदी में एक ही दिन के अंदर 6.27 फीसदी की गिरावट आई है. एमसीएक्स के साथ लोकल मार्केट की बात करें तो इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार शुक्रवार को बाजार बंद होने तक सोने का भाव करीब 1,54,238 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा. चांदी में भी बिकवाली का बड़ा दबाव देखा गया. दिल्ली के सराफा बाजार में एक ही दिन में चांदी 5 हजार रुपये टूटकर 2,60,700 प्रति किलोग्राम पर आ गई.
बड़े शहरों में सोने के भाव ( 24 कैरेट, रुपये/10 ग्राम)
- दिल्ली- 1,55,180
- मुंबई- 1,55,450
- पटना- 1,55,370
- जयपुर- 1,55,430
- कानपुर- 1,55,490
- लखनऊ- 1,55,490
चांदी के भाव (रुपये/किलोग्राम)
- दिल्ली- 2,48,190
- मुंबई- 2,48,620
- पटना- 2,48,490
- जयपुर- 2,48,590
- कानपुर- 2,48,690
- लखनऊ- 2,48,690
ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी के भाव
इंटरनेशनल मार्केट की बात करें तो हाजिर सोना टूटकर करीब 4,470.79 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है. वहीं दूसरी तरफ चांदी का भाव 72.89 डॉलर प्रति औंस पर बना हुआ है. एक्सपर्ट का मानना है कि इस ग्लोबल टेंशन के चलते निवेशकों का रुख बदल रहा है, जिसा सीधा असर कीमतों पर पड़ा है.
कीमतों को लेकर क्या बोले एक्सपर्ट?
ब्राउन ब्रदर्स हैरिमन एंड कंपनी के एलियास हद्दाद का कहना है कि इस समय सोने की कीमत पर दोहरी मार पड़ रही है. एक तरफ ब्याज दरों के हिसाब से मिलने वाला रिटर्न बढ़ रहा है, दूसरी तरफ डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे सोने में निवेशकों की रुचि कम हुई है. उनका मानना है कि आगे चलकर सोने के साथ चांदी की कीमतों में और गिरावट आ सकती है. खासतौर पर जब उनकी कीमतें 200 दिन के मूविंग एवरेज से नीचे चली जाएं. इससे पता चलता है कि बाजार की लंबी अवधि वाली सोच कमजोर हो रही है.