सोने में 2008 के बाद सबसे बड़ी गिरावट, एक महीने का रिकॉर्ड देखिए! जंग के बीच चढ़ने की बजाय गिरने के 3 कारण ये रहे

Why Gold Prices Crash amid Middle East Conflict: सोना अमूमन जियोपॉलिटिकल टेंशन के बीच चढ़ता है, लेकिन इस बार चढ़ने की बजाय गिरता ही जा रहा है. आप भी चौंके तो जरूर होंगे. इसके पीछे एक्‍सपर्ट ने जो 3 लाइन में 3 कारण बताए हैं, उसके बाद कोई कन्‍फ्यूजन नहीं रह जाती है. क्‍या आप भी समझना चाहेंगे?

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Gold Prices Record Crash: सोने में गिरावट का 17 साल का रिकॉर्ड टूट गया, इस रिपोर्ट में मात्र 3 लाइन में समझ लीजिए कारण

Gold Prices Crash Reasons: नया वित्त वर्ष शुरू होते ही सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट हुई है. दो अप्रैल को 12 बजे तक सोना 4500 रुपये गिरकर 1.45 लाख रुपये के भाव पर ट्रेड करता दिखा. वहीं चांदी 14,000 से ज्‍यादा गिरकर 2.27 लाख रुपये के भाव पर ट्रेड करता दिखा. मार्च का महीना सोने के लिए बड़ी गिरावट वाला साबित रहा. मिडिल ईस्‍ट में चल रही जंग के चलते वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच सोने की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है. गिरावट ऐसी कि 17 वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया. गिरावट ऐसी, जैसी 2008 की वैश्विक मंदी के समय पहली बार देखने को मिली है. गिरावट ऐसी कि महज एक महीने में 1 लाख रुपये का सोना, 86 हजार का हो गया. जी हां, रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च के महीने में गोल्‍ड ने पिछले 17 वर्षों की सबसे खराब मासिक प्रदर्शन का सामना किया है. निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश के रूप में सोने के बजाय अमेरिकी डॉलर को प्राथमिकता देने के कारण इस कीमती धातु की चमक फीकी पड़ गई है.

अक्टूबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट

इस महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में 13% से अधिक की गिरावट आई है, जो अक्टूबर 2008 के बाद से इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट है. आंकड़ों के अनुसार, इस साल 29 जनवरी को सोना $5,594.82 प्रति औंस के अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन वहां से अब तक इसकी कीमतों में करीब 18.70% की कमी आ चुकी है. फिलहाल स्पॉट गोल्ड $4,550.68 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है.

क्यों गिर रहे हैं दाम, Expert ने बताए 3 कारण

केडिया एडवायजरी के MD अजय केडिया ने NDTV से बातचीत में बताया कि युद्ध के दौरान अमूमन देखा गया है कि सोने-चांदी को सेफ हेवन यानी सुरक्षित निवेश माना जाता है और जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच इसकी कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उल्‍टा होता दिखा. उन्‍होंने इसके पीछे कुछ वजहें बताई हैं. 

  1. डॉलर इंडेक्‍स की मजबूती: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध और महंगाई के डर के बीच निवेशकों ने डॉलर को सबसे सुरक्षित संपत्ति (Safe Haven) माना है. डॉलर इंडेक्स जुलाई के बाद से अपने सबसे बड़े मासिक लाभ की ओर बढ़ रहा है.
  2. ब्याज दरों की उम्मीदें: युद्ध के कारण ऊर्जा लागत (Energy Costs) में उछाल आया है, जिससे भविष्य में ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद बढ़ गई है. ट्रेडर्स अब इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की किसी भी संभावना को लगभग नकार चुके हैं.
  3. रेसिप्रोकल रिलेशन की वापसी: जानकारों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान सोने का व्यवहार बदल गया था, लेकिन ईरान युद्ध के बाद सोने ने अपने पारंपरिक रुख को फिर से अपना लिया है. अब बॉन्ड यील्ड और डॉलर में वृद्धि होने पर सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है.

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प्‍लैटिनम और पैलेडियम की कीमतें भी गिरीं 

सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं के लिए भी मार्च का महीना भारी रहा है. चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में इस महीने लगभग 20-20% की गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, मंगलवार को मामूली सुधार के साथ स्पॉट सिल्वर $71.89 प्रति औंस पर देखा गया.

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क्या आगे बढ़ेंगी कीमतें?

भले ही मौजूदा समय में गिरावट का दौर है, लेकिन भविष्य को लेकर अनुमान अभी भी सकारात्मक हैं. गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का मानना है कि केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने के भंडार में विविधता लाने और भविष्य में फेडरल रिजर्व द्वारा नरमी बरतने की उम्मीद के चलते 2026 के अंत तक सोने का भाव $5,400 प्रति औंस तक पहुंच सकता है. फिलहाल, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और मिडिल ईस्ट का तनाव बाजार पर हावी है, जिससे सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है.

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