मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं. वहीं पड़ोसी देशों पाकिस्तान और नेपाल में ईंधन की कीमतों में 42 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे साफ है कि ग्लोबल मार्केट के असर के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है.
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती कीमतों का बोझ आम लोगों पर न पड़े, इसके लिए घरेलू स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की गई है.
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, दिल्ली में ये हैं लेटेस्ट रेट
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है. राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 प्रति लीटर और डीजल ₹87.62 प्रति लीटर मिल रहा है.जबकि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है, उसके बावजूद घरेलू बाजार में स्थिरता बनाए रखना उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात मानी जा रही है.
पाकिस्तान में डेढ़ महीने में पेट्रोल-डीजल 37% से ज्यादा महंगा
पाकिस्तान में 28 फरवरी को पेट्रोल की कीमत 266.17 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर थी, जो 16 अप्रैल तक बढ़कर 366.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है.वहीं डीजल की कीमत 280.86 रुपये से बढ़कर 385.54 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है. इस अवधि में पेट्रोल करीब 37.74 प्रतिशत और डीजल करीब 37.27 प्रतिशत महंगा हो गया है.यह बढ़ोतरी दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का असर वहां सीधे आम लोगों पर पड़ा है.
नेपाल में एक महीने में चार बार बढ़े दाम, पेट्रोल 42% तक महंगा
नेपाल में भी पिछले एक महीने के दौरान चार बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है.28 फरवरी को नेपाल में पेट्रोल 154 नेपाली रुपये प्रति लीटर था, जो अब बढ़कर 219 रुपये प्रति लीटर हो गया है. वहीं डीजल की कीमत 156 रुपये से बढ़कर 207 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है.इस दौरान पेट्रोल की कीमत में 42.20 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 32.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. फिलहाल दक्षिण एशिया में नेपाल में पेट्रोल-डीजल सबसे महंगा माना जा रहा है.
कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.इसके चलते दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है.सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतें स्थिर रखीं. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं को बचाने के लिए मोदी सरकार ने भार स्वयं वहन करने का फैसला लिया है.
दुनिया के कई हिस्सों में 20% से 50% तक बढ़ी ईंधन कीमतें
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहा है. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ईंधन कीमतें करीब 30% से 50% तक बढ़ी हैं.उत्तरी अमेरिका में करीब 30 प्रतिशत, यूरोप में लगभग 20 प्रतिशत और अफ्रीकी देशों में करीब 50 प्रतिशत तक कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
ऐसे वैश्विक माहौल में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का स्थिर रहना उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.














