Foreign Stock Investing Dividend: अगर आप विदेशी कंपनियों के शेयर में पैसा लगा रहे हैं और मिलने वाले डिविडेंड की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को नहीं दे रहे हैं तो थोड़ा सावधान हो जाएं. दरअसल रिपोर्ट है कि निवेशक विदेशी शेयरों खरीदने और बेचने की जानकारी तो अपने आईटीआर में देते हैं, लेकिन उनसे मिलने वाले डिविडेंड को रिपोर्ट करना भूल जाते हैं. यही भूल आपके घर पर इनकम टैक्स का बड़ा नोटिस ला सकती है. इतना ही नहीं साथ में 200 फीसदी का जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल जो लोग अमेरिका या दूसरे विदेशी बाजारों में निवेश करते हैं, वो अपने इनकम टैक्स रिटर्न के फॉरेन एसेट्स में अपने शेयरों से मिलने वाले डिविडेंड को 'दूसरे सोर्स से हुई इनकम' में दिखाना भूल जाते हैं. वहीं अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट विदेशी डेटा एक्सचेंज के जरिए ऐसे मामलों के बारे में जानकारी ले रहा है.
डिविडेंड के बारे में बताना क्यों जरूरी?
भारत में टैक्स नियमों की बात करें तो अगर आप भारत के निवासी हैं तो आपकी ग्लोबल इनकम पर भारत में टैक्स लगेगा. इसका मतलब है कि चाहे आपने पैसा अमेरिका में कमाया हो या जापान में, आपको उसकी जानकारी देश के टैक्स डिपार्टमेंट को देनी होगी.
मान लीजिए किसी अमेरिकी कंपनी ने आपको 10 डॉलर का डिविडेंड दिया. अमेरिका में नियमों के अनुसार वहां की सरकार इस पर 25% विथहोल्डिंग टैक्स के तौर पर काट लेगी और आपके खाते में 7.5 डॉलर आएंगे. अब इसके बाद भारतीय निवेशकों को लगता है कि टैक्स तो कट गया, अब क्या बताना? पर मामला यहीं से खराब होता है. आपको अपनी ITR में पूरे 10 डॉलर की इनकम दिखानी होगी.
अब आप कहेंगे कि ये तो दो-दो बार टैक्स लग रहा है. उसके लिए भारत और अमेरिका के बीच डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) है, जिसमें आप उस 2.5 डॉलर का फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC) क्लेम कर सकते हैं, यानी परेशान ना हों आपको दो बार टैक्स नहीं देना पड़ेगा.
इनकम ना बताने पर कितना जुर्माना?
डिविडेंड इनकम के बारे में टैक्स डिपार्टमेंट को जानकारी नहीं देते हैं रिपोर्ट नहीं करते हैं, तो इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270A के तहत, कम इनकम दिखाने पर टैक्स का 50% और जानबूझकर गलत जानकारी देने पर टैक्स का 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा, ब्लैक मनी एक्ट में भी कार्रवाई हो सकती है.
गलती हो गई तो कैसे सुधारें?
मान लीजिए अगर आपने पिछले साल के रिटर्न में इसके बारे में नहीं बताया तो परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है. सरकार ने इसके लिए अपडेट रिटर्न का ऑप्शन दिया है. अपने असेसमेंट ईयर पूरा होने के 24 महीने के अंदरअपना रिटर्न अपडेट कर सकते हैं. हालांकि इसके लिए कुछ पेनल्टी आपको देनी होगी.
अगर 12 महीने के अंदर अपडेट करते हैं, तो आपको बचे हुए टैक्स और ब्याज पर 25% एक्सट्रा टैक्स देना होगा. अगर वहीं 12 से 24 महीने के बीच करते हैं, तो ये पेनल्टी 50% हो जाएगी. ऐसे में कहा जा सकता है यह ऑप्शन 200% जुर्माने से तो कहीं ज्यादा बढ़िया है.
निवेशक किन बातों का रखें ध्यान
विदेश से हुई इनकम के बारे में जानकारी देते हुए आपको कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए. जैसे हर विदेशी एसेट और बैंक खाते की जानकारी 'शेड्यूल FA' में दी जाए. साथ ही विदेशी टैक्स क्रेडिट का फायदा लेने के लिए समय पर फॉर्म 67 भरें. सबसे बड़ी बात हमेशा टैक्स कटने से पहले वाले टोटल अमाउंट को अपनी इनकम में शामिल करना ना भूलें.














