भारत में विदेशी निवेशकों ने बदला अपना प्लान, IT छोड़ अब इन सेक्टर्स में जमकर लगा रहे पैसा

FII Investment Strategy 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से आईटी सेक्टर में छंटनी के डर के बीच विदेशी निवेशक देश के मेटल्स, पावर, बैंकिंग सेक्टर में बड़ा निवेश कर रहे हैं.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
नई दिल्ली:

FII Investment Strategy 2026: जहां एक ओर पूरी दुनिया इजरायल-ईरान जंग की वजह से उथल पुथल का दौर देख रही है. वहीं दूसरी तरफ भारत में विदेशी निवेशकों का प्लान कुछ बदला नजर आ रहा है. दरअसल विदेशी निवेशक (FIIs), जो कभी भारतीय आईटी सेक्टर के दीवाने हुआ करते थे, अब मेटल्स, पावर और कैपिटल गुड्स में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं. आखिर क्यों विदेशी निवेशकों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है? इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं. 

FII Investment Strategy 2026

IT सेक्टर से दूरी क्यों?

मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि भारतीय आईटी अभी फिलहाल तकनीकी बदलाव का सामना कर रहा है. जिस तरह डिजिटल फोटोग्राफी ने रील मार्केट को बाजार से बाहर कर दिया था, उसी तरह चैटजीपीटी और क्लाउड  जैसे एआई मॉडल्स भारतीय आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल के लिए खतरा बन रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, 2026 के शुरुआती महीनों में ही विदेशी निवेशकों ने आईटी सेक्टर से करीब 18,784 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं.

FII Investment Strategy 2026

FII सेक्टर इनफ्लो (जनवरी–फरवरी 2026)

  • मेटल्स: 17,164 करोड़ रुपये
  • कैपिटल गुड्स: 14,896 करोड़ रुपये
  • ऑयल एंड गैस: 4,441 करोड़ रुपये
  • कंस्ट्रक्शन: 2,955 करोड़ रुपये
  • पावर: 2,639 करोड़ रुपये

मेटल्स और पावर में बढ़ी दिलचस्पी

आईटी से पैसा निकालकर विदेशी निवेशक अब उन सेक्टर में लगा रहे हैं जिन्हें एआई से खतरा कम और विकास से फायदा ज्यादा है. स्टील, एल्युमीनियम और पावर जैसे सेक्टर्स में निवेश बढ़ा है. CLSA और नोमुरा जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि भारत का बुनियादी ढांचा और ऊर्जा की बढ़ती डिमांड इन सेक्टर्स को लंबे समय के लिए फायदेमंद और सेफ बनाती है. खासतौर पर वेदांता और टाटा स्टील जैसे मेटल शेयरों में विदेशी निवेशकों की इनफ्लो बढ़ा है.

इंफ्रास्ट्रक्चर का दबदबा

हालांकि बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस अभी भी विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई हैं. प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर्स के बैंकों में विदेशी हिस्सेदारी बढ़कर 34.7% तक पहुंच गई है. निवेशकों का मानना है कि भले ही एआई दुनिया को बदल दे, लेकिन लोन की डिमांड, देश के इंफ्रा पर काम और पावर एनर्जी की खपत कम नहीं होगी.

Advertisement
Featured Video Of The Day
Syed Suhail | Iran Attack Oil Depot | Iran का फरमान नहीं मिलेगा तेल, उड़ा डाले डिपो | Trump | War