EPFO Higher Pension: क्या आपकी सैलरी के आधार पर होगा पेंशन कैलकुलेशन? सरकार ने संसद में लाखों पेंशनर्स के लिए कह दी ये बात

EPS-95 Pension News:भले ही लोग मिनिमम मंथली पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं. लेकिन मंत्रालय के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि सरकार अभी इस पर भी कोई ठोस कदम उठाने के मूड में नहीं है.

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EPFO Higher Pension Update: लेबर मिनिस्ट्री ने संसद में साफ किया कि EPS-95 पेंशन कैलकुलेशन एक्चुअल सैलरी पर करने का कोई प्रस्ताव नहीं है. (AI Image)
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नई दिल्ली:

EPS pension calculation: क्या आप भी अपनी एक्चुअल सैलरी (Actual Salary) के आधार पर ज्यादा पेंशन मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के लाखों सब्सक्राइबर्स जो लंबे समय से हायर पेंशन (Higher Pension) और मिनिमम पेंशन में बढ़ोतरी की उम्मीद लगाए बैठे थे, उनके लिए सरकार की ओर से एक बड़ी अपडेट आई है. श्रम मंत्रालय (Labour Ministry) ने संसद में साफ-साफ कह दिया है कि फिलहाल ईपीएस-95 (EPS-95) के तहत पेंशन कैलकुलेशन एक्चुअल सैलरी पर करने का कोई इरादा नहीं है. आसान शब्दों में कहें तो, पेंशन के लिए जो ₹15,000 की सैलरी लिमिट (EPFO Wage Ceiling) तय है, उसे हटाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है. आइए जानते हैं सरकार ने संसद में और क्या-क्या दलीलें दी हैं...

दरअसल, लोकसभा में 30 मार्च, 2026 को सांसद गिरिधारी यादव ने एक लिखित सवाल पूछा था. उन्होंने दो अहम मुद्दों पर सफाई मांगी थी....

  • क्या ईपीएस पेंशन की कैलकुलेशन ₹15,000 की सैलरी कैप पर की जाती है, जिसकी वजह से ज्यादा सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को भी कम पेंशन मिलती है?
  • क्या सरकार का प्लान है कि पेंशन अब 'एक्चुअल बेसिक सैलरी' यानी आपकी असली तनख्वाह के आधार पर कैलकुलेट की जाए?

श्रम मंत्री का स्पष्ट जवाब, "कोई प्रस्ताव नहीं"

श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने सदन में पूछे गए इस सवाल पर जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि ईपीएस-95 एक 'डिफाइंड कॉन्ट्रिब्यूशन-डिफाइंड बेनिफिट' सोशल सिक्योरिटी स्कीम है. उन्होंने साफ कर दिया कि सरकार के पास फिलहाल सैलरी कैप के इस स्ट्रक्चर को बदलने का कोई विचार नहीं है.

पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति और अन्य पहलुओं को देखते हुए, वास्तविक सैलरी पर पेंशन देने का कोई नया प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.यानी ₹15,000 की वो पुरानी लिमिट फिलहाल वैसी ही बनी रहेगी.  यह उन कर्मचारियों के लिए निराशाजनक हो सकता है जो रिटायरमेंट के बाद बड़ी राशि की उम्मीद कर रहे थे.

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क्यों नहीं बढ़ पा रही है पेंशन? गणित समझें

श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने समझाया कि पेंशन का जो फंड (Corpus) है, वो कैसे बनता है.कंपनी यानी एंप्लॉयर आपकी सैलरी का 8.33% हिस्सा पेंशन फंड में डालता है.केंद्र सरकार भी इसमें 1.16% का योगदान देती है.लेकिन पेंच ये है कि सरकार का यह योगदान सिर्फ ₹15,000 प्रति माह तक की सैलरी पर ही सीमित है. यही सबसे बड़ी वजह है कि पेंशन कैलकुलेशन को पूरी तरह से आपकी एक्चुअल हायर सैलरी से लिंक नहीं किया जा रहा है.

कर्मचारियों की क्या थी मांग?

फिलहाल ईपीएस (EPS) के तहत पेंशन के लिए वेतन की अधिकतम सीमा ₹15,000 तय है. देशभर के लाखों कर्मचारियों की मांग थी कि पेंशन का कैलकुलेशन उनकी 'एक्चुअल सैलरी' पर की जाए, क्योंकि आज के समय में ज्यादातर लोगों की बेसिक सैलरी ₹15,000 से कहीं ज्यादा होती है. उनका तर्क है कि जब वो ज्यादा कॉन्ट्रीब्यूशन देने को तैयार हैं, तो उन्हें पेंशन भी उनकी असली सैलरी के हिसाब से मिलनी चाहिए.

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लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि इस ₹15,000 की सीमा से ऊपर जाकर पेंशन कैलकुलेट करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव टेबल पर नहीं है.सरकार के इस ताजा रुख से फिलहाल इन उम्मीदों को झटका लगा है.

क्या अब नहीं बढ़ेगी ₹1,000 की मिनिमम पेंशन?

पेंशनर्स लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि ₹1,000 की न्यूनतम मासिक पेंशन बहुत कम है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए.भले ही लोग मिनिमम मंथली पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन सरकार के इस नो प्रपोजल वाले रुख से संकेत मिलता है कि फिलहाल पेंशन के पूरे ढांचे में किसी बड़े बदलाव की तैयारी नहीं है.

हालांकि देशभर में इसके लिए विरोध प्रदर्शन और मांगें तेज हो रही हैं, लेकिन मंत्रालय के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि सरकार अभी इस पर भी कोई ठोस कदम उठाने के मूड में नहीं है. जब तक ₹15,000 की सैलरी सीलिंग नहीं बढ़ती, तब तक पेंशन की राशि में बड़ा उछाल आना मुश्किल लग रहा है.

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