रिलायंस पावर से जुड़ी इकाइयों पर ED की रेड, कंपनी ने कार्यालय या परिसर में छापेमारी से किया इनकार

 ED कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के साथ-साथ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत वित्तीय अनियमितताओं के लिए अनिल अंबानी से जुड़ी कई कंपनियों की जांच कर रही है.

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Anil Ambani Bankruptcy Case: अनिल अंबानी के ठिकानों पर ED की छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को उद्योगपति अनिल अंबानी के समूह की कंपनी 'रिलायंस पावर लिमिटेड' से जुड़ी इकाइयों के खिलाफ जांच के तहत मुंबई और हैदराबाद में कई स्थानों पर तलाशी ली. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि मुंबई और हैदराबाद में उक्त कंपनी और उसके अधिकारियों से जुड़े लगभग 10-12 स्थानों पर तलाशी ली जा रही है. उन्होंने कहा कि एजेंसी की लगभग 15 टीमें इस कार्रवाई को अंजाम दे रही हैं.

कंपनी ने कार्यालय में छापेमारी से किया इनकार 

हालांकि, रिलायंस पावर ने इस बात से इनकार किया है कि जांच एजेंसी ने उसके किसी कार्यालय या परिसर में छापेमारी की है. रिलायंस पावर ने शेयर बाजारों को दिए एक बयान में कहा कि उसकी जानकारी के अनुसार, कंपनी के किसी भी कार्यालय या परिसर में ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

बता दें कि ED कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के साथ-साथ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत वित्तीय अनियमितताओं के लिए अनिल अंबानी से जुड़ी कई कंपनियों की जांच कर रही है. इस जांच के हिस्से के रूप में 66 वर्षीय अंबानी से मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून के तहत ED दो बार पूछताछ कर चुकी है.

बैंक धोखाधड़ी मामले में हो चुकी है कुर्की 

इससे पहले, ED ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) के बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी के पाली हिल स्थित आलीशान घर 'एबोड' (Abode) को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) किया था, जिसकी कीमत 3,716.83 करोड़ रुपये आंकी गई है.

पिछले महीने के अंत में, CBI ने भी बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर अनिल अंबानी के आवास और RCom के कार्यालयों की तलाशी ली थी.

अनिल अंबानी की कंपनी पर क्या हैं आरोप?

CBI की FIR के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का नुकसान पहुंचाया है. आरोप है कि कंपनी ने कर्ज के पैसों का गलत इस्तेमाल किया और फर्जी लेनदेन के जरिए पैसे इधर-उधर किए. साथ ही, कंपनी के खातों (Books of Accounts) में हेराफेरी कर अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश की गई. फिलहाल, ED ने इन ताजा छापों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.

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