मध्य पूर्व में जारी अशांति और भू-राजनीतिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में एक बार फिर बड़ी अनिश्चितता पैदा कर दी है. अमेरिकी-ईरान वार्ता को लेकर जारी अनिश्चितता और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल मालवाहक जहाजों पर लगातार हमलों की वजह से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. इसका सीधा असर भारतीय तेल बाजार पर पड़ा है, जहां कच्चे तेल की औसत कीमत में फरवरी के मुकाबले 26 मार्च, 2026 तक 62.19% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर
पेट्रोलियम मंत्रालय के PPAC (Petroleum Planning and Analysis Cell) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व एशिया में युद्ध की वजह से 26 मार्च, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत US$ 115.75/बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी रही. इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि संकट का असर लंबे समय तक रहने की संभावना है. 1 मार्च से 26 मार्च, 2026 के बीच कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत US$ 111.93/बैरल के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है.
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत महज 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी. यानी, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष की वजह से 26 मार्च, 2026 तक भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की औसत कीमत फरवरी की औसत कीमत के मुकाबले 42.92 अमेरिकी डॉलर/बैरल तक बढ़ चुकी है, जो 62.19% की भारी बढ़ोतरी है.
सरकार ने सक्रिय की वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस भारी उछाल और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती जोखिमों के मद्देनज़र, भारत सरकार ने तेल के आयात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था को एक्टिवेट कर दिया है. सरकार की रणनीति अब तेल आयात मार्गों और आपूर्तिकर्ता देशों में विविधता लाने पर केंद्रित है.
भारत के पास तेल आयात के लिए 41 देशों का एक व्यापक नेटवर्क है, जो आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत बनाता है. एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के तहत, भारत अब 70% कच्चा तेल Strait of Hormuz के अलावा दूसरे समुद्री मार्गों से आयात कर रहा है, जो पहले केवल 55% होता था. यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी रुकावट के प्रभाव को कम करने के लिए उठाया गया है.
रिफाइनरियों को घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के आदेश
पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुक्रवार को एक प्रेस रिलीज़ जारी कर देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की स्थिति पर विस्तृत जानकारी दी है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि, "सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं, और पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा जा रहा है."
रिलीज़ के मुताबिक, सरकार ने घरेलू रिफाइनरियों को उनकी निर्यात क्षमता पर सीमाएं लगा दी हैं. आदेश दिया गया है कि घरेलू रिफाइनरियों को उनके द्वारा निर्यातित पेट्रोल का 50 प्रतिशत और निर्यातित डीजल का 30 प्रतिशत घरेलू बाजार में आपूर्ति करना होगा. यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी माँग के बावजूद देश में तेल की कमी न हो.
अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
प्रेस रिलीज़ में मंत्रालय ने कुछ क्षेत्रों में तेल की कमी की अफवाहों के चलते देखी गई अफरा-तफरी और दुकानों पर भीड़भाड़ की रिपोर्टों पर भी संज्ञान लिया है. मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि, "देश भर में सभी खुदरा दुकानें सामान्य रूप से काम कर रही हैं. देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है." सरकार ने जनता को किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करने की सलाह को दोहराया है और कहा है कि देश में ईंधन का कोई संकट नहीं है.
ये भी पढ़ें:














