AI की रेस में चीन ने अमेरिका को पछाड़ा, ग्लोबल टॉप-10 से बाहर हुए ChatGPT और Gemini

ओपनराउटर के अनुसार ग्लोबल एआई टोकन इस्तेमाल के मामले में चीन के एआई मॉडल्स ने अमेरिकी कंपनियों को पीछे कर टॉप 10 में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा ली है.

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चीन ने एआई रेस में अपने आपको सभी से आगे बना लिया है. चीनी एआई मॉडल्स ने अमेरिकी एआई मॉडल्स के मुकाबले ज्यादा टोकन इस्तेमाल हासिल किए.
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ग्लोबल मार्केट में इस समय एआई को लेकर रेस लगी हुई है कि कौन सा देश इस भविष्य की तकनीक में अपने आप को आगे रख पाता है. अभी तक एआई मार्केट में यूएस की कंपनियों का दबदबा देखने को मिलता था, लेकिन अब चीन के एआई मॉडल्स ने पूरी कहानी ही बदल दी है. ग्लोबल एआई एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म ओपनराउटर के अनुसार दुनिया के टॉप 10 एआई मॉडल्स में टोकन इस्तेमाल के मामले में चीन के एआई मॉडल्स की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा हो गई है.

गूगल, ओपन एआई टॉप 10 से बाहर

ओपनराउटर के अनुसार, चीन का डीपसीक V4 4.63 ट्रिलियन टोकन के साथ दुनिया का सबसे पॉपुलर एआई मॉडल बन गया है. इसके बाद दूसरे नंबर पर चीन के ही मिनिमैक्स एम3 4.13 ट्रिलियन और तीसरे नंबर पर शाओमी का MiMo 3.8 ट्रिलियन टोकन के साथ मौजूद है. यानी टॉप 3 पर पूरी तरह से चीन का कब्जा है. इनके अलावा टेनसेंट का Hy3 और डीपसीक प्रो भी टॉप 10 में मौजूद है. बड़ी बात ये है कि अमेरिका का केवल एंथ्रोपिक का क्लाउड मॉडल ही टॉप 5 में मौजूद है. दुनियाभर में फेमस गूगल का जेमिनी और ओपनएआई का जीपीटी 5.5 इस टॉप 10 लिस्ट से बाहर है. ये दोनों 12 और 13 नंबर पर रहे.

क्या है ये टोकन का फंडा?

एआई मॉडल जिस डेटा यूनिट का इ्स्तेमाल करते हैं, उसे टोकन कहते हैं. आसान भाषा में कहें तो मान लीजिए आपने एआई से कोई सवाल पूछा या फिर उससे कोडिंग कराई तो एआई उन शब्दों को टोकन के फॉर्म में गिनता है. जिस मॉडल का जितना टोकन इस्तेमाल होगा, उससे पता चलेगा कि दुनियाभर के डेवलपर्स और कंपनियां उस एआई मॉडल का इस्तेमाल सबसे ज्यादा कर रही हैं. ओपनराउटर के अनुसार 15 जून के खत्म हुए हफ्ते में 47.1 ट्रिलियन टोकन का इस्तेमाल हुआ था, जबकि पिछले हफ्ते ये आंकड़ा 44.6 ट्रिलियन था.

आखिर चीन कैसे जीत रहा एआई की रेस?

फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार चीन अपनी एनर्जी की कॉस्ट को कम रखने में सफल हो पाया है. साथ ही बेहतरीन एआई कैपेसिटी ने इस मामले में उसकी मदद की है. चीनी लैब्स अपने एआई टोकन के लिए अमेरिकी कंपनियों के मुकाबले कम पैसे चार्ज कर रही हैं, जिससे देश को एआई सेक्टर में नई बढ़त मिली. वहीं अमेरिकी कंपनियां अब टोकन-आधारित बिलिंग की ओर बढ़ रही हैं. यानी जितना इस्तेमाल, उतना पैसा लिया जाएगा. इसकी वजह से अमेजन, सिस्को, उबर जैसी बड़ी कंपनियों का बजट बिगड़ रहा है. इसी को देखते हुए वो अपने कर्मचारियों को महंगे अमेरिकी एआई टूल्स की जगह सस्ते चीनी एआई मॉडल्स की इस्तेमाल करने के लिए बोल रही हैं. 

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गोल्डमैन सैक्स ने भविष्यवाणी की है कि साल 2030 तक एआई टोकन के इस्तेमाल में 24 गुना का इजाफा देखने को मिल सकता है, जिससे अगले 12 से 18 महीनों में चिप्स की कमी और भी बढ़ जाएगी.

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