अगर आप अपने घर से दूर किसी दूसरे शहर में पढ़ाई कर रहे हैं या काम की तलाश में आए प्रवासी मजदूर हैं, तो आपके लिए गुड न्यूज है. ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से गैस सप्लाई पर मंडराते खतरे के बीच, मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने राज्यों के लिए 5 किलो वाले छोटू (FTL) गैस सिलेंडर का कोटा दोगुना कर दिया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब आपको खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और न ही ब्लैक में महंगे दाम चुकाने होंगे.
मजदूरों और छात्रों के लिए 'छोटू' बना सहारा
अक्सर प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए गैस कनेक्शन लेना एक सिरदर्द होता है क्योंकि उनके पास पक्का एड्रेस प्रूफ नहीं होता. इसी समस्या को देखते हुए सरकार ने 5 किलो वाला 'छोटू' सिलेंडर लॉन्च किया था. इसे खरीदने के लिए किसी भारी-भरकम कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं होती, बस एक आईडी प्रूफ दिखाकर इसे लिया जा सकता है. अब केंद्र सरकार ने राज्यों को चिट्ठी लिखकर इसके डेली एलोकेशन को डबल करने का आदेश दिया है.
युद्ध के संकट के बीच LPG पर सरकार का 'मास्टरस्ट्रोक'
मिडिल-ईस्ट में चल रही जंग की वजह से LPG की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है. ऐसे में गरीब और मिडिल क्लास को परेशानी न हो, इसके लिए सरकार ने यह कदम उठाया है. नए नियमों के तहत, 2-3 मार्च 2026 के औसत सप्लाई के आधार पर कोटा तय किया जाएगा. यह पहले से तय 20% की सीमा के अलावा होगा. सरकार का मकसद साफ है कि महंगाई और किल्लत के दौर में भी हर चूल्हा जलता रहे.
बिना एड्रेस प्रूफ के मिलेगी गैस, ब्लैक मार्केटिंग पर लगेगी लगाम
इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होगा जो किराए के कमरों में रहते हैं या बार-बार जगह बदलते हैं. एड्रेस प्रूफ न होने के कारण कई लोग ब्लैक मार्केट से महंगे दाम पर गैस खरीदने को मजबूर थे. अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि ये अतिरिक्त 5 किलो वाले सिलेंडर सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचें. सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कोटे का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ प्रवासी मजदूरों और कमजोर वर्गों के लिए ही किया जाएगा.
पोर्टेबिलिटी और कम खर्च का फायदा
5 किलो वाले इन सिलेंडरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना बेहद आसान है. इसके साथ ही, इनका रिफिल खर्च भी कम होता है, जो दिहाड़ी मजदूरों और पॉकेट मनी पर जीने वाले छात्रों के लिए एकदम फिट बैठता है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे इसके डिस्ट्रीब्यूशन पर कड़ी नजर रखें ताकि इसका लाभ सही लोगों तक पहुंचे.
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