केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026 पेश किया. वित्त मंत्री ने बजट में कई बड़ी घोषणाएं की हैं. इसमें देश में सात नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर, बायोफार्मा, पर्यटन,रेयर अर्थ मिनरल्स और सेमी कंडक्टर निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं. विशेषज्ञ इसे भविष्य को ध्यान में रखकर उठाए गए कदम बता रहे हैं.वित्त मंत्रालय के नए पते कर्तव्य भवन में तैयार यह पहला बजट, तीन कर्तव्यों से प्रेरित है. ये कर्तव्य हैं- आर्थिक वृद्धि को तेज करना व बनाए रखना,दूसरा कर्तव्य है लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना और तीसरा कर्तव्य 'सबका साथ, सबका विकास' का विजन.आइए देखते हैं कि देश के पांच प्रमुख अर्थशास्त्री इस बजट को कैसे देख रहे हैं.
1- एनके सिंह, 15 वित्त आयोग के प्रमुख
वर्तमान चुनौतियों को देखते हुए निर्मला सीतारमण की ओर से पेश किया गया बजट बहुत सराहनीय है. उन्होंने कहा कि सरकार ने जो प्रस्ताव किए हैं, वह आज के समय की चुनौतियों से पार पाने के लिए हैं. उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री ने इकोनॉमिक सर्वे के बारे में तो कुछ नहीं कहा लेकिन उन्होंन फिस्कल डेफिसिट और फिस्कल कंसोलिडेशन पर जो लक्ष्य दिया है, वह मेरे मुताबिक बहुत ही विश्वसनीय है.
2-विनायक चटर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के विशेषज्ञ
मैं खुद को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर तक ही सीमित रखूंगा. मोदी सरकार ने 2014 से 2025 तक के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर बहुत ध्यान दिया था. उसने आर्थिक विकास को बढावा देने के लिए इस सेक्टर के लिए बड़े पैमान पर बजट का आवंटन किया था. लेकिन इस बजट में सरकार ने इससे अपने हाथ खींच लिए हैं.
3-मिताली निकोरे,अर्थशास्त्री
यह बजट भविष्य की ओर उठाया गया कदम है. इस बजट की मुख्य बात इसका लांग टर्म एजेंडा है. उनका कहना था कि सरकार का फोकस टीयर-2 और टीयर-3 शहरों, इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर है.
4- बीवीआर सुब्रमण्यम, नीति आयोग के CEO
पिछले दो बजटों का विस्तार और निरंतरता बताया. उन्होंने बताया इसे सर्विस सेक्टर पर फोकस किया गया है जिसे देखे जाने की जरूरत है. उन्होंने NDTV के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि जहां इससे पहले के दो बजट में रोजगार, स्किलिंग और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दिया गया था, वहीं इस साल के बजट में सर्विस सेक्टर, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल इंटीग्रेशन के लिए महत्वपूर्ण पहलें शामिल की गई हैं.
5- आदित्य सिन्हा, अर्थशास्त्री
सरकार ने वित्तीय घाटा (Fiscal Deficit) 2026-27 में जीडीपी का 4.3 फीसदी रखने का लक्ष्य रखा है. यह 2025-26 में 4.4 फीसदी था. इससे साफ है कि सरकार धीरे-धीरे घाटा कम करने की नीति पर चल रही है.सरकारी कर्ज जीडीपी के मुकाबले 56.1 फीसदी से घटकर 55.6 फीसदी होने का अनुमान है, ताकि 2030-31 तक इसे लगभग 50 फीसदी तक लाया जा सके.बजट में अनुमान लगाया गया है कि सरकार को 36.5 लाख करोड़ रुपये की आय होगी.
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