भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया. नई रोजगार गारंटी योजना 'विकसित भारत-जी राम जी' या वीबी-जी राम जी के लिए 95692 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है. यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) की जगह आई है. पिछले साल मनरेगा को 86,000 करोड़ रुपये का बजट मिला था. यानी इसबार ग्रामीम रोजगार के लिए सरकार ने अपने बजट को 11.27 प्रतिशत बढ़ा दिया है.
मनरेगा की जगह आई है वीबी-जी राम जी योजना
केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत काम की मांग में बड़ी गिरावट को देखते हुए विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून लागू किया है. संक्षेप में इसे VB–G RAM G कानून कहा जाता है जो पिछली योजना का एक व्यापक वैधानिक संशोधन है.
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा 2005 में लागू हुआ था और इसने मजदूरी आधारित रोजगार प्रदान किया, ग्रामीण आय को स्थिरता दी और बुनियादी ढांचा तैयार किया. वित्त वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि समय के साथ ग्रामीण रोजगार की आवश्यकताओं का स्वरूप बदल गया. इसकी वजह से मनरेगा की उपलब्धियों और इसके स्वरूप एवं उद्देश्यों के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता आन पड़ी.
सरकार के अनुसार मनरेगा में बड़े बदलाव के बाद VB–G RAM G योजना को लाया गया है. यह मनरेगा की संरचनात्मक कमियों को दूर करते हुए रोजगार, पारदर्शिता, योजना और जवाबदेही को मजबूत करता है. वीबी-जी राम जी योजना के तहत रोजगार की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है. श्रमिकों को शारीरिक श्रम करना अनिवार्य है, बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज की जाती है, और 370 रुपए की मजदूरी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाती है.
इस आर्थिक समीक्षा के अनुसार वित्त वर्ष 2021 में महामारी के दौरान व्यक्ति दिवस 389.09 करोड़ के चरम पर पहुंच गए थे, लेकिन वित्त वर्ष 2026 (31 दिसंबर 2025 तक) में ये घटकर लगभग 183.77 करोड़ रह गए, जो 53 फीसदी से अधिक की गिरावट है.














