कल 1 फरवरी को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट 2026 का पिटारा खोलेंगी, तो देश के करोड़ों लोगों की धड़कनें तेज होंगी. इस बार बजट रविवार को आ रहा है, लेकिन टैक्सपेयर्स की उम्मीदें कम नहीं है. पिछले साल सरकार ने नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को चुनना डिफॉल्ट बना दिया था, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इस साल पुराने टैक्स सिस्टम (Old Regime) को हमेशा के लिए विदा कर दिया जाएगा या फिर कुछ राहत मिलेगी?
₹12 लाख तक की कमाई को टैक्स फ्री करने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या सरकार महंगाई के इस दौर में मिडिल क्लास के हाथ में कुछ और कैश छोड़ेगी. क्या होम लोन सस्ती होगी या फिर बुजुर्गों को इलाज के खर्च में बड़ी राहत मिलेगी? आइए जानते हैं इस बजट से जुड़ी हर वो बात जो सीधे आपकी जेब पर असर डालने वाली है...
टैक्सपेयर्स की विशलिस्ट: स्टैंडर्ड डिडक्शन और 80C पर नजर
नौकरीपेशा लोगों के लिए बजट का मतलब है 'टैक्स में बचत'. इस बार सबसे बड़ी मांग स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹75,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की है. लोगों का कहना है कि अगर यह लिमिट बढ़ती है, तो सीधे तौर पर उनकी सैलरी का बड़ा हिस्सा टैक्स के चंगुल से बच जाएगा.
वहीं, पुरानी टैक्स रिजीम वाले लोग बरसों से Section 80C की ₹1.5 लाख वाली सीमा के बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार पुरानी रिजीम को जारी रखना चाहती है, तो उसे बचत और निवेश को बढ़ावा देने के लिए इन लिमिट्स को रिवाइज करना ही होगा.
होमबायर्स और सीनियर सिटीजन की मांगें
घर खरीदने वालों के लिए सबसे बड़ी राहत होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट हो सकती है. फिलहाल Section 24(b) के तहत ₹2 लाख तक की छूट मिलती है, जिसे बढ़ाकर ₹5 लाख करने की मांग जोर पकड़ रही है.
वहीं सीनियर सिटीजन की उम्मीद है कि नई टैक्स रिजीम में भी उन्हें उम्र के आधार पर अलग टैक्स स्लैब मिले और उनके हेल्थ इंश्योरेंस (Section 80D) पर ज्यादा टैक्स छूट दी जाए. सरकार का फोकस इस बार इन दोनों वर्गों को खुश करने पर हो सकता है ताकि रियल एस्टेट और हेल्थकेयर सेक्टर को मजबूती मिल सके.
शेयर बाजार के निवेशक और किसानों की ये उम्मीद
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स ( LTCG) टैक्स है. शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड से होने वाले मुनाफे पर टैक्स-फ्री लिमिट को ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख करने की उम्मीद की जा रही है.
वहीं, अन्नदाता यानी किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की राशि बढ़ाने और खाद-बीज पर मिलने वाली सब्सिडी में बढ़ोतरी की चर्चा है.
कुल मिलाकर, बजट 2026 का फोकस 'सिम्पलीसिटी और क्लैरिटी' पर रहने वाला है, जिससे आम आदमी को उलझे नियमों से राहत मिल सके.














