दुनिया की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक (BlackRock) ने अपने 26 बिलियन डॉलर (करीब 2.15 लाख करोड़ रुपये) के विशाल 'प्राइवेट क्रेडिट फंड' से निवेशकों द्वारा पैसा निकालने पर पाबंदी लगा दी है. कंपनी का यह कदम 1.8 ट्रिलियन डॉलर वाले वैश्विक प्राइवेट क्रेडिट इंडस्ट्री में बढ़ती घबराहट का ताजा संकेत माना जा रहा है.
क्या है पूरा मामला?
ब्लैकरॉक के प्रमुख फंड, जिसे HLEND (HPS Corporate Lending Fund) के नाम से जाना जाता है, से हाल ही में निवेशकों ने बड़ी मात्रा में पैसा निकालने (Redemption) की मांग की थी. आंकड़ों के मुताबिक, शेयरधारकों ने अपनी कुल हिस्सेदारी का 9.3% वापस मांगा था, जिसकी कीमत लगभग 1.2 बिलियन डॉलर बैठती है.
हालांकि, ब्लैकरॉक मैनेजमेंट ने इस निकासी पर 5% की सीमा (Cap) लगा दी. इसका मतलब है कि निवेशकों को फिलहाल केवल 620 मिलियन डॉलर ही वापस मिल पाएंगे. निजी ऋण बाजार (Private Credit Market) में इस तरह निकासी को रोकना 'गेटिंग' (Gating) कहलाता है, जो बाजार में तनाव बढ़ने पर किया जाता है.
निकासी रोकने की क्या है वजह?
ब्लैकरॉक ने अपने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह फंड के बेहतर प्रबंधन के लिए जरूरी है. कंपनी के मुताबिक,
- अवधि का अंतर (Structural Mismatch): प्राइवेट क्रेडिट फंड उन कंपनियों को कर्ज देते हैं जिनकी अवधि लंबी होती है. अगर अचानक बहुत सारे निवेशक पैसा मांगेंगे, तो कंपनी को घाटे में अपनी संपत्तियां बेचनी पड़ सकती हैं.
- निवेशकों की सुरक्षा: निकासी की सीमा तय करने से फंड की सुरक्षा बनी रहती है और उन निवेशकों के हितों की रक्षा होती है जो फंड में बने रहना चाहते हैं.
बाजार पर असर
इस खबर के बाद शुक्रवार को ब्लैकरॉक के शेयरों में 8.3% तक की गिरावट दर्ज की गई. इसका असर दूसरी बड़ी कंपनियों जैसे KKR और एरेस मैनेजमेंट पर भी दिखा. दरअसल, निवेशकों को डर है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी बदलती तकनीक और आर्थिक अस्थिरता के कारण कई कंपनियां अपना कर्ज नहीं चुका पाएंगी.
प्राइवेट क्रेडिट क्या है?
प्राइवेट क्रेडिट एक तरह का कर्ज है जो बैंक नहीं, बल्कि निजी कंपनियां (जैसे ब्लैकरॉक) सीधे व्यवसायों को देती हैं. इसमें जोखिम और मुनाफा दोनों अधिक होता है. हाल के दिनों में कई बड़ी कंपनियों के धराशायी होने से इस सेक्टर में निवेशकों का डर बढ़ गया है. जानकारों का कहना है कि ब्लैकरॉक का यह कदम, वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता की ओर इशारा कर रहा है, जहां ब्लैकस्टोन जैसी अन्य कंपनियों ने खुद पैसा लगाकर निवेशकों की निकासी की मांग पूरी की, वहीं ब्लैकरॉक ने कड़ा रुख अपनाना बेहतर समझा.
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