RBI UPI Payment Delay: भारत में यूपीआई डिजिटल पेमेंट की जान बन चुका है. सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों में भी यूपीआई ने रिकॉर्ड तोड़ ट्रांजैक्शन किए हैं. हालांकि अब यूपीआई एक नए दौर में एंट्री करने जा रहा है. दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) UPI सिस्टम में ऐसा बदलाव लाने की तैयारी कर रहा है, जिससे पेमेंट भले ही तेज रहे, लेकिन जरूरत पड़ने पर उसे रोका भी जा सके. इसका मकसद बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड से आम लोगों को राहत देना है. आरबीआई साफ कर चुका है कि ये कोई सिस्टम स्लोडाउन नहीं है. बल्कि ये सिर्फ रिस्क वाले ट्रांजैक्शन पर ही लागू होगा.
नए नियमों में क्या बदलाव होगा?
एक बात यहां जानना जरूरी है कि मर्चेंट को किए जाने वाले पेमेंट पहले के जैसे ही तुरंत होंगे. यानी कम रकम वाले ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं होगा.साथ ही अपने भरोसेमंद रिसीवर को व्हाइटलिस्ट किया जा सकेगा. आरबीआई का कहना है कि रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन में किसी भी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी.
नए नियमों की जरूरत क्यों?
फिलहाल यूपीआई की सबसे बड़ी ताकत उसकी तेजी कई बार उसी की कमजोरी बन जाती है. जैसे ही पैसा भेजा जाता है, ट्रांजैक्शन तब ही पूरा हो जाता है और उसे वापस लेने का कोई ऑप्शन नहीं बचता. मान लीजिए आपने गलत रिसीवर को पेमेंट कर दिया तो फिर उसे रोका नहीं जा सकता. इसलिए रिजर्व बैंक अब इस समस्या को खत्म करना चाहता है. नया सिस्टम एक रिवर्सल विंडो या कूलिंग पीरियड देगा. यानी कुछ समय जिसमें यूज़र ट्रांजैक्शन को रोक सकता है.
'धीमा नहीं, बल्कि कंट्रोल पेमेंट'
Easebuzz के सीटीओ और डायरेक्टर अमित कुमार मानते हैं कि इस बदलाव को स्लो कहना गलत है. हर लेन-देन में एक जैसा खतरा नहीं होता. हमारी स्टडीज बताती हैं कि ज्यादातर फ्रॉड 10 हजार रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन में होते हैं और इनमें तकनीक नहीं बल्कि इंसानी भूल ज्यादा होती है. वो कहते हैं कि कूलिंग पीरियड यूज़र को एक गोल्डन आवर देता है, जिसमें वो ट्रांजैक्शन रोक सकता है.
पहले सेफ्टी जरूरी
mFilterIt के सीईओ और को-फाउंडर अमित रीलन का मानना है कि सिर्फ पेमेंट से पहले उन्हें रोकना बहुत नहीं है. भरोसा खाता खोलने से शुरू होना चाहिए. पेमेंट होने से पहले रियल-टाइम इंटेलिजेंस, AI बेस्ड सिस्टम और बिहेवियरल एनालिसिस ऐसे खतरे पहले ही पहचान सकते हैं.
यूजर्स को मिलेगा सुकून
PlusCash के फाउंडर और सीईओ प्रणव कुमार कहते हैं कि ये नियम खासतौर पर नए डिजिटल पेमेंट यूजर्स और पहली बार बड़ा ट्रांजैक्शन करने वालों के लिए बहुत सेफ होगा. उनके अनुसार, थोड़ी सी देरी यूज़र को सोचने का मौका देगी. इसमें कोई शक नहीं कि यूपीआई की तेजी में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन बदले में सेफ्टी कहीं ज्यादा मिलेगी."
सोच-समझ वाला पेमेंट सिस्टम
एक्सपर्ट मानते हैं कि कूलिंग पीरियड, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और यूजर की जानकारी मिलकर भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और मजबूत बनाएंगे. भले ही शुरुआत में हम लोगों को इसकी आदत डालनी पड़े, लेकिन लंबे समय में ये सिस्टम ज्यादा भरोसेमंद और सेफ साबित हो सकता है.














