'देश का कोई बच्‍चा भूखा न सोए...', वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल बेटे अग्निवेश के और कौन से अधूरे सपने पूरे करेंगे?

अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे अग्निवेश अग्रवाल के निधन के बाद जो भावुक पोस्‍ट लिखी थी, उसमें बेटे के सपनों (No child in the country should go to bed hungry, every woman should be self-reliant) का भी जिक्र कियाAnil Agarwal emotional note, अनिल अग्रवाल भावुक पोस्ट, Vedanta Group successor news था.

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वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल अपने बेटे अग्निवेश के सपने पूरे करेंगे, पूरा जीवन सादगी से जीने की बात वो कह चुके हैं.

'बेटा अग्निवेश, तुम्हारे बिना जिंदगी हमेशा अधूरी रहेगी, लेकिन तुम्हारे सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा' ये शब्‍द हैं एक पिता के... ये वादा है, उस बेटे से, जो कुछ ही दिन पहले दुनिया को अलिवदा कह गया. वो पिता कोई आम आदमी नहीं, बल्कि देश के जाने-माने उद्योगपति हैं- अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal), वेदांता ग्रुप के चेयरमैन. लेकिन बेटे (Agnivesh Agarwal) के असामयिक निधन के बाद वे टूट-से गए. लोगों ने ढाढ़स बंधाया तो उन्‍होंने धन्‍यवाद करते हुए इसे हिंदुस्‍तान की खूबसूरती बताई. लिखा, 'अग्निवेश ने जो सपने देखे थे, अब वो मुझे पूरे करने हैं. आप सभी में मुझे कई अग्निवेश दिखते हैं… और इसी हौसले के साथ मैं आगे बढ़ने की हिम्‍मत जुटा रहा रहा हूं.' 

अनिल अग्रवाल इन दिनों अपने जीवन के बेहद बुरे दौर से गुजर रहे हैं. इसी महीने उनके इकलौते बेटे अग्निवेश अग्रवाल (Agnivesh Agarwal) दुनिया को अलविदा कह गए. बीते 7 जनवरी को अनिल अग्रवाल ने बेहद भावुक पोस्‍ट लिखा था. उन्‍होंने अपनी 75 फीसदी संपत्ति दान करने की बात भी दोहराई थी. अब एक बार फिर उन्‍होंने एक इमोशनल पोस्‍ट किया है, जिसमें उन्‍होंने बेटे अग्निवेश के सपने (Anil Agarwal will Donate 75 Percent Wealth to fulfill His Son's Dream) पूरे करने की बात कही है. 

बेटे के सपने पूरे करने को लेकर अनिल अग्रवाल ने क्‍या कहा? 

अनिल अग्रवाल ने बेटे अग्निवेश के निधन के बाद सोशल मीडिया पर दूसरी पोस्‍ट 23 जनवरी को की, जिसमें उन्‍होंने लिखा, 'वक्‍त अपनी रफ्तार से चलता रहता है, वो कभी किसी के लिए नहीं रुकता... इसी का नाम जिंदगी है.' आगे उन्‍होंने लिखा, 'अग्निवेश ने जो सपने देखे थे, अब वो मुझे पूरे करने हैं. आप सभी में मुझे कई अग्निवेश दिखते हैं… और इसी हौसले के साथ मैं आगे बढ़ने की हिम्‍मत जुटा रहा रहा हूं.' 

अनिल अग्रवाल ने भावुक पोस्‍ट में किया था अग्निवेश के सपनों का जिक्र  

अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे अग्निवेश अग्रवाल के निधन के बाद जो भावुक पोस्‍ट लिखी थी, उसमें बेटे के सपनों का भी जिक्र किया था. उन्‍होंने बेटे अग्निवेश को 'यारों का यार' बताया था. लिखा था- 'अपनी मां का दुलारा अग्नि बचपन में बेहद चंचल और शरारती था. हमेशा हंसता, मुस्कुराता. यारों का यार था वो.' उन्‍होंने लिखा था, 'वो सिर्फ बेटा नहीं था, वो मेरा दोस्त था, मेरी शान था, मेरी पूरी दुनिया था.' इसके बाद उन्‍होंने बेटे अग्निवेश के सपनों का भी जिक्र किया था. 

अग्निवेश के क्‍या-क्‍या सपने थे, जिन्‍हें पूरा करेंगे अनिल अग्रवाल?

अनिल अग्रवाल ने लिखा था, 'अग्नि और मेरा सपना था, हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना. वो हमेशा कहता था- पापा, हमारे देश में क्या नहीं है? फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें? हमारी दिली इच्छा यही रही कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए, कोई बच्चा अनपढ़ न रहे, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और सभी युवाओं को रोजगार मिले.' 

अनिल अग्रवाल की 7 जनवरी वाली पोस्‍ट का अंश

अनिल अग्रवाल ने किया है 75 फीसदी कमाई दान करने का वादा 

बेटे अग्निवेश के निधन के बाद अनिल अग्रवाल ने अपनी 75 फीसदी कमाई दान करने का वादा दोहराया था. उन्‍होंने पोस्‍ट में लिखा था, 'मैंने अग्निवेश से वादा किया था हमारे पास जितना भी धन आएगा, उसका 75% से ज्यादा समाज के काम में लगाएंगे. आज फिर वो वादा दोहराता हूं. अब और भी सादगी से जीवन जीऊंगा. और अपनी बाकी जिंदगी इसी में लगा दूंगा.' 

नंद घर प्रोजेक्‍ट के जरिये समाजसेवा कर रहे अनिल अग्रवाल 

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बेटे के निधन के बाद उनकी स्मृति में अपनी संपत्ति का 75% हिस्सा दान करने का संकल्प दोहराया है. उनका यह मिशन मुख्य रूप से 'नंद घर' (Nand Ghar)' पहल के जरिए चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण खत्म करना और महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है. 

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कैसे हुई थी अग्निवेश अग्रवाल की मौत? 

अग्निवेश अपने दोस्त के साथ अमेरिका में स्‍कीइंग करने गए थे, जहां उनका एक्‍सीडेंट हो गया. इसके बाद न्‍यूयॉर्क के माउंट सिनाई हॉस्पिटल ( Mount Sinai Hospital, New York) में उनका इलाज चल रहा था. वे ठीक भी हो रहे थे, लेकिन कार्डियक अरेस्‍ट आया और अग्निवेश इस दुनिया को विदा कह गए. अनिल अग्रवाल पिछले 15-16 दिनों में अपने जीवन के बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, उनका ये दुख भरने नहीं वाला! बेटे की कमी भला कैसे पूरी हो पाएगी. लेकिन उन्‍होंने खुद को मजबूत बनाया और बेटे का सपना पूरा करने का संकल्‍प लिया है. 

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