भारतीय सेना की बढ़ी ताकत, अदाणी डिफेंस ने समय से पहले सौंपी 'प्रहार' गन की पहली खेप

अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सेना को 2 हजार प्रहार लाइट मशीन गन (LMG) की पहली खेप सौंप दी है. मेक इन इंडिया के तहत बने ये आधुनिक हथियार समय से 11 महीने पहले डिलीवर किए गए हैं.

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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस (Adani Defence and Aerospace) ने भारतीय सेना को स्वदेशी रूप से निर्मित 'प्रहार' लाइट मशीन गन (LMG) की पहली खेप सौंप दी है. ये गन अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज ने मिलकर भारत में बनाई है. 7.62 मिमी कैलिबर वाली ये एलएमजी गन 40 हजार से ज्यादा बंदूकों के एक बड़े ऑर्डर का हिस्सा हैं और इनका निर्माण मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत किया गया है. ये गन तय समय से 11 महीने पहले ही सेना को सौंप दी गईं. इन्हें ग्वालियर में कंपनी के शस्त्र कारखाने में भारतीय सेना को हस्तांतरित किया गया. रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ए. अनबरासु और अदाणी डिफेंस के सीईओ आशीष राजवंशी ने मिलकर पहली खेप ले जाने वाले ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.

adani defence delivers first batch prahar lmg

समय से 11 महीने पहले डिलीवरी

एनडीटीवी से बातचीत में आशीष राजवंशी ने बताया कि कंपनी ने डिलीवरी अनुबंध में तय समय से 11 महीने पहले काम पूरा कर दिया है. उन्होंने कहा कि बोली लगाने से लेकर अब तक की पूरी प्रक्रिया छह साल चली और वे इसे तय समय से पहले पूरा करने में सफल रहे हैं. उन्हें मूल रूप से ये काम सात साल से ज्यादा में करना था, लेकिन अगले तीन साल में पूरा ऑर्डर पूरा कर दिया जाएगा.

'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा

राजवंशी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का असली मकसद सिर्फ हथियार बनाना नहीं था, बल्कि भारत में लंबे समय तक रहने वाली उत्पादन क्षमता तैयार करना था. उन्होंने आगे कहा कि उनकी कंपनी पहले सिर्फ पुर्जे बनाती थी, लेकिन अब वो एक पूरा ओरिज़िनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर बन चुकी है, जो लाइट मशीन गन, असॉल्ट राइफल, पिस्तौल, स्नाइपर और कार्बाइन जैसे कई तरह के हथियार बना सकती है. उन्होंने बताया कि ये प्लांट हर साल 1 लाख तक आग्नेयास्त्र बनाने की क्षमता रखता है. इसके लिए इंडस्ट्री 4.0 सिस्टम लगाए गए हैं, जिनसे क्वालिटी बहुत अच्छी रहती है और खराबी की दर 0.5% से भी कम है. राजवंशी का कहना है कि इस क्षमता का फायदा देश की जरूरत और निर्यात, दोनों में होगा. उन्होंने कहा, नीति निर्माता आज भारतीय रक्षा निर्माण का भविष्य देख रहे हैं.

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वहीं, अनबरासु ने कहा कि ये परियोजना दिखाती है कि भारत समय पर अनुबंध पूरे करते हुए भी तेजी से काम कर सकता है. उनके अनुसार इस प्रोजेक्ट का बड़ा पैमाना और इसकी तेजी भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने में बहुत अहम है. उन्होंने कहा कि सरकार रक्षा उद्योग के साथ मिलकर काम कर रही है और उद्योग की जरूरतों के अनुसार रक्षा खरीद प्रक्रिया में बदलाव किए जा रहे हैं.

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भारत के लिए गर्व की बात

इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज (IWI) के सीईओ शुकी श्वार्ट्ज ने बताया कि नेगेव एलएमजी पैदल सैनिकों के लिए बहुत जरूरी हथियार है और उनकी क्षमता बढ़ाता है. उन्होंने कहा कि इस हथियार की पहले भी 2020 में 16 हजार यूनिट भारत को दी गई थीं, जो बहुत काम आईं. अब जब ये भारत में ही बनाया जा रहा है, तो ये देश के लिए गर्व की बात है और इससे भारतीय सेना की आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी. पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से सप्लाई रुकने की आशंकाओं पर उन्होंने कहा कि इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज के पास इजरायल में भी एक बड़ी सुविधा है जो भारत की जरूरतें पूरी कर सकती है और भारत में बना उनका संयुक्त उद्यम भी किसी भी परिस्थिति में उत्पादन कर सकता है.

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प्रहार LMG की खासियतें

प्रहार एलएमजी पैदल सेना की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए बनाया गया है. ये ओपन बोल्ट सिस्टम पर चलता है और इसमें घूमने वाला बोल्ट होता है. इसमें 508 मिमी की बैरल और 1,000 मिमी की कुल लंबाई है, जो स्टॉक मोड़ने पर 820 मिमी रह जाती है. इससे पैराट्रूपर्स इसे आसानी से ले जा सकते हैं. इसका वजन 7.6 किलोग्राम है, जो दूसरे समान हथियारों से हल्का है. कई अन्य हथियार इससे 22% से 38% तक ज्यादा भारी होते हैं.

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(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)

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