कर्मचारी संगठनों (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने एक ऐसा मेमोरेंडम सौंपा है, जो अगर मंजूर हो गया तो आपकी सैलरी सीधे रॉकेट की रफ्तार से बढ़ेगी. इस बार सिर्फ महंगाई भत्ता ही नहीं, बल्कि आपके पूरे सैलरी स्ट्रक्चर (8th Pay Salary Structure) को बदलने की तैयारी है.NC-JCM की ड्राफ्ट कमेटी ने 8वें वेतन आयोग के लिए जो मेमोरेंडम दिया है, उसमें केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है. कर्मचारियों ने मांग की है कि सैलरी तय करने वाले पुराने उलझे हुए लेवल खत्म किए जाएं और बेसिक पे को सीधा ₹69,000 से शुरू किया जाए.
अगर इन सुझावों का कुछ हिस्सा भी सरकार मान लेती है, तो 2026 से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस नए प्रस्ताव के बाद आपकी जेब कितनी भारी होने वाली है.
सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव, 18 पे-लेवल घटकर रह जाएंगे सिर्फ 7
कर्मचारी संगठनों ने मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर को आसान बनाने के लिए बड़ा बदलाव सुझाया है.अभी तक7वें वेतन आयोग में 18 अलग-अलग पे-लेवल हैं, जिससे करियर और प्रमोशन का हिसाब-किताब काफी उलझा हुआ रहता था. NC-JCM ने सुझाव दिया है कि इन 18 लेवल्स को आपस में मर्ज (Merge) कर दिया जाए और केवल 7 बड़े 'पे-स्केल' बनाए जाएं.इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों की प्रमोशन प्रोसेस आसान होगा और एक ही पद पर अटके रहने की समस्या खत्म हो जाएगी.
किन-किन पे-लेवल को मिलाकर बनेंगे नए पे-स्केल?
मेमोरेंडम के मुताबिक...
- पे-लेवल 2 और 3 को मिलाकर नया पे-स्केल-2 बनाया जाएगा.
- पे-लेवल 4 और 5 को मिलाकर नया पे-स्केल-3 बनेगा.
- इसी तरह पे-लेवल 6, 7, 8, 9 और 10 को भी मर्ज कर बड़े और आसान ग्रेड बनाने का सुझाव दिया गया है.
न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करने का प्रस्ताव
मेमोरेंडम में सबसे अहम मांग न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाने की है. अभी Level-1 की शुरुआती सैलरी ₹18,000 है, जिसे बढ़ाकर ₹69,000 करने का सुझाव दिया गया है.इसके लिए 3.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने की सिफारिश की गई है. यही फिटमेंट फैक्टर (Fitment factor in 8th pay commission) सभी लेवल की सैलरी और पेंशन पर लागू करने की बात कही गई है, जिससे पूरे सैलरी स्ट्रक्चर में एकसमान बढ़ोतरी हो सके.साथ ही कर्मचारियों ने मांग की है कि नई सैलरी 1 जनवरी 2026 से लागू की जाए.
हर साल 6% वार्षिक इंक्रीमेंट देने की भी सिफारिश
मेमोरेंडम में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि नए पे-स्केल लागू होने के बाद हर साल 6% का वार्षिक इंक्रीमेंट दिया जाए. यह मौजूदा व्यवस्था से ज्यादा है और इसका मकसद महंगाई के असर को संतुलित करना और कर्मचारियों की आय को समय के साथ बेहतर बनाए रखना है.
फिटमेंट फैक्टर 3.83 लागू होने पर किस लेवल की कितनी बढ़ेगी सैलरी? पूरी डिटेल्स
ड्राफ्ट मेमोरेंडम के साथ साझा टेबल के अनुसार, 3.833 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की मांग की गई है. अगर यह फॉर्मूला लागू होता है यानी फिटमेंट फैक्टर 3.83 लागू होने पर नए पे-स्केल में न्यूनतम बेसिक सैलरी कुछइस तरह हो सकती है...
- Level-1 की ₹18,000 शुरुआती सैलरी बढ़कर लगभग ₹69,000 हो सकती है.
- Level-2 और Level-3 को मिलाकर बनने वाले नए पे-स्केल-2 में न्यूनतम सैलरी करीब ₹83,200 तक पहुंच सकती है.
- Level-4 और Level-5 के मर्ज होने के बाद नए पे-स्केल-3 में न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग ₹1.12 लाख हो सकती है.
- Level-6 के आधार पर बनने वाले पे-स्केल-4 में शुरुआती बेसिक सैलरी करीब ₹1.35 लाख तक जा सकती है.
- Level-7 और Level-8 को मिलाकर बनने वाले पे-स्केल-5 में न्यूनतम सैलरी लगभग ₹1.82 लाख तक पहुंच सकती है.
- Level-9 और Level-10 के मर्ज होने के बाद पे-स्केल-6 में शुरुआती बेसिक सैलरी करीब ₹2.15 लाख तक हो सकती है.
वहीं Level-11 से Level-17 तक पर भी 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया गया है, जिससे वहां भी समान अनुपात में सैलरी बढ़ेगी.
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करियर ग्रोथ आसान बनाने के लिए बदला जा रहा पूरा स्ट्रक्चर
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कम पे-लेवल होने से प्रमोशन का रास्ता आसान होगा और कर्मचारियों को लंबे समय तक एक ही ग्रेड में नहीं रुकना पड़ेगा.आसान पे-स्केल से सैलरी स्ट्रक्चर भी पारदर्शी बनेगा और कर्मचारियों को अपने भविष्य की इनकम का अंदाजा लगाना आसान होगा.
सालाना इंक्रीमेंट और भत्तों में भी बंपर बढ़ोतरी
सिर्फ बेसिक पे ही नहीं, बल्कि हर साल लगने वाली वेतन वृद्धि (Annual Increment) को भी 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग की गई है. इसके पीछे तर्क यह है कि बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों की परचेजिंग पावर बनी रहे. इसके अलावा, पेंशन सिक्योरिटी और भत्तों (Allowances) में भी बड़े सुधारों का खाका तैयार किया गया है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इन सभी बदलावों को 1 जनवरी 2026 से बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए.
अब आगे क्या होगा?
NC-JCM केंद्रीय कर्मचारियों के कई संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए उसका मेमोरेंडम 8वें वेतन आयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि फिलहाल ये सिर्फ सिफारिशें हैं. फिलहाल ये सभी सुझाव 8वें वेतन आयोग के सामने रखे गए हैं. NC-JCM एक बहुत बड़ा कर्मचारी संघ है, इसलिए सरकार इन मांगों को नजरअंदाज नहीं कर सकती. हालांकि, आखिरी फैसला केंद्र सरकार को ही लेना है. लेकिन अगर इन प्रस्तावों का बड़ा हिस्सा भी मंजूर होता है, तो 2026 से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.














