8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले, ₹1,000 वाले मेडिकल अलाउंस को ₹20,000 करने का प्रस्ताव, जानें लेटेस्ट अपडेट

8th Pay Commission salary Calculator: कर्मचारी संगठन ने सैलरी बढ़ाने के नए फार्मूले और फिटमेंट फैक्टर को 3.25 करने की पुरानी मांग को फिर से दोहराया है. इसके अलावा, एनुअल सैलरी इंक्रीमेंट को भी 3% से बढ़ाकर 7% करने का प्रस्ताव रखा है. 

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8th Pay Commission News: 8वें वेतन आयोग ने दिल्ली के जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में अपना ऑफिस शुरू कर दिया है.
नई दिल्ली:

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच हलचल काफी तेज हो गई है. जब से सरकार ने इसके लिए  टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए हैं, तभी से कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर काफी एक्टिव हैं. कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार उनकी पुरानी मांगों को गंभीरता से सुना जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चर्चा एक खास मेडिकल अलाउंस (Medical Allowance) को लेकर हो रही है, जिसे कई गुना बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है.

मेडिकल अलाउंस में 20 गुना बढ़ोतरी का बड़ा प्रस्ताव

कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को महीने के 1,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 20,000 रुपये किया जाए. यह मांग उन कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए है जो ऐसी जगहों पर रहते हैं जहां सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) की सुविधा नहीं है. संगठनों का कहना है कि आज की महंगाई में 1,000 रुपये बहुत कम हैं और गांव या दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए इलाज का खर्च उठाना मुश्किल हो गया है.

फिटमेंट फैक्टर और सालाना इंक्रीमेंट पर जोर

कर्मचारी संगठन सिर्फ मेडिकल सुविधा ही नहीं बल्कि सैलरी बढ़ाने के नए फार्मूले पर भी जोर दे रहे हैं. फिटमेंट फैक्टर को 3.25 करने की पुरानी मांग को फिर से दोहराया गया है. इसके अलावा, सालाना मिलने वाली सैलरी इंक्रीमेंट (Annual Increment) को भी 3% से बढ़ाकर 7% करने का प्रस्ताव रखा गया है. 

पोस्टल विभाग के संगठनों का सुझाव है कि इसे कम से कम 5% तो किया ही जाना चाहिए क्योंकि लंबे समय की नौकरी के बाद 3% की बढ़ोतरी से घर चलाने में कोई खास मदद नहीं मिलती.

66% तक बढ़ सकती है कर्मचारियों की बेसिक सैलरी

एक बहुत ही अहम मांग परिवार की यूनिट को लेकर है जिसे 3 से बढ़ाकर 5 करने को कहा गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब कर्मचारी के ऊपर निर्भर रहने वाले माता-पिता को भी परिवार का हिस्सा माना जाए. यूनियनों का दावा है कि अगर सरकार इसे मान लेती है, तो बेसिक सैलरी कैलकुलेशन पर 66% तक का बड़ा असर पड़ेगा. इससे कर्मचारियों के हाथ में आने वाली सैलरी काफी बढ़ सकती है.

छुट्टियों के बदले कैश और रिटायरमेंट के फायदों पर नजर

कर्मचारियों ने मांग की है कि एलटीसी (LTC) की सुविधा को अब कैश के रूप में दिया जाए ताकि कर्मचारी अपनी सुविधा अनुसार खर्च कर सकें. साथ ही रिटायरमेंट के समय मिलने वाली छुट्टियों के बदले पैसे (Leave Encashment) लिमिट को 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने का प्रस्ताव भी दिया गया है. इसके साथ ही पेंशन और अन्य रिटायरमेंट फायदों को भी बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि बुढ़ापा और सुरक्षित हो सके.

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पुरानी पेंशन (OPS) की मांग ने फिर पकड़ी रफ्तार

पेंशन का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पूरी तरह बहाल करने की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया गया है. यूनियनों का साफ कहना है कि एनपीएस (NPS) और यूपीएस (UPS) जैसी नई योजनाओं को खत्म कर पुरानी पेंशन को ही लागू किया जाए. हालांकि सरकार की तरफ से अभी इस पर कोई बड़ा इशारा नहीं मिला है, लेकिन कर्मचारी संगठन अपनी मांग पर अड़े हुए हैं.

वेतन आयोग का काम हुआ तेज, जल्द मिल सकती है खुशखबरी

8वें वेतन आयोग ने दिल्ली के जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में अपना ऑफिस शुरू कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई इसकी अध्यक्ष हैं. ऑफिस खुलने का मतलब है कि आयोग अब अपने काम की रफ्तार बढ़ा रहा है. आने वाले कुछ महीनों में यह साफ हो जाएगा कि सरकार कर्मचारियों की इन मांगों पर कितना राजी होती है. अगर मेडिकल अलाउंस और सैलरी बढ़ाने जैसे प्रस्ताव मान लिए जाते हैं, तो करीब 1 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलेगी.

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