8th Pay Commission: इस राज्य कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सैलरी- पेंशन बढ़ाने की तैयारी शुरू

8th Pay Commission Update: नया वेतन आयोग राज्य सरकार के उन लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए काम करेगा, जिनकी सैलरी पिछले काफी समय से पुराने स्ट्रक्चर पर आधारित थी. यह फैसला असम के लाखों सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए राहत लेकर आया है.

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8th Pay Commission salary Hike 2026: 8वें असम वेतन आयोग को अपनी पूरी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है.
नई दिल्ली:

8th Pay Commission News: असम सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बहुत बड़ी और खुशखबरी आई है. राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए 8वें वेतन आयोग (8th Assam Pay Commission) के गठन का ऐलान कर दिया है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्श की इनकम बढ़ सकती है.

लंबे समय से सैलरी और भत्ते बढ़ाने की मांग चल रही थी, ऐसे में इस फैसले के बाद अब लाखों कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल आने की उम्मीद जाग गई है, जिससे राज्य के सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है. यह फैसला लाखों परिवारों के लिए राहत की खबर माना जा रहा है. सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और सरकारी कामकाज भी बेहतर होगा.

2016 के बाद पहली बार सैलरी में बड़ा बदलाव!

असम में आखिरी बार सैलरी में बदलाव 1 अप्रैल 2016 से लागू हुआ था. यह बदलाव 7वें असम वेतन  की सिफारिश के आधार पर किया गया था. इसके बाद से अब तक कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा रिवीजन नहीं हुआ. असम सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर  को पूरी तरह बेहतर बनाने के लिए 8वें असम वेतन आयोग, 2026 को मंजूरी दे दी है.अब 10 साल बाद फिर से सैलरी स्ट्रक्चर की पूरी समीक्षा शुरू हो गई है. इससे उम्मीद है कि महंगाई और खर्च बढ़ने के बीच कर्मचारियों को राहत मिलेगी.

पूर्व IAS अधिकारी को मिली बड़ी जिम्मेदारी

सरकार ने इस आयोग की कमान रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभाष चंद्र दास को सौंपी है. इस आयोग में चेयरमैन के साथ सात अन्य सदस्य भी शामिल किए गए हैं, जो मिलकर राज्य के आर्थिक हालात और कर्मचारियों की जरूरतों का बारीकी से अध्ययन करेंगे. इसमें वित्त विभाग, कार्मिक विभाग और अन्य महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. 

इसके साथ ही गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतुल महंता को भी सदस्य बनाया गया है. आयोग का मुख्यालय गुवाहाटी में रहेगा और सचिव, वित्त विभाग सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे.सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल कर्मचारियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रशासन में काम करने की क्षमता भी बढ़ेगी.

अगले 18 महीनों में आएगी फाइनल रिपोर्ट

8वें असम वेतन आयोग को अपनी पूरी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. इसके बाद सैलरी और भत्तों में बदलाव लागू किया जा सकता है. आयोग इस दौरान असम के पुराने सैलरी रिवीजन, देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की संभावित सिफारिशों को भी ध्यान में रखेगा. अगर जरूरत हुई तो रिपोर्ट देने की समय सीमा बढ़ाई भी जा सकती है. रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार चरणों में सैलरी बढ़ाने का फैसला भी कर सकती है.

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यह आयोग सिर्फ सैलरी ही नहीं बल्कि भत्ते, काम की शर्तें और अन्य सुविधाओं की भी समीक्षा करेगा.आयोग यह भी देखेगा कि समय के साथ सैलरी में क्या बदलाव हुए हैं और वर्तमान आर्थिक हालात क्या हैं.

पेंशनर्स के लिए भी आई राहत भरी खबर

सरकार ने इस बार केवल मौजूदा कर्मचारियों का ही नहीं, बल्कि बुजुर्ग पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का भी खास ख्याल रखा है. आयोग इस बात की जांच करेगा कि बढ़ती महंगाई और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) को देखते हुए पेंशनर्स को मिलने वाली राशि कितनी बढ़ाई जानी चाहिए. इसके साथ ही महंगाई राहत और पेंशन रिवीजन के लिए एक ऐसा सिस्टम बनाने का सुझाव दिया जाएगा, जो भविष्य में भी पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सके.

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डिजिटल सिस्टम और कामकाज में सुधार पर जोर

सरकार का कहना है कि सैलरी बढ़ाने के साथ साथ सरकारी कामकाज को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा. इसमें डिजिटल टेक्नोलॉजी का ज्यादा इस्तेमाल, कर्मचारियों की ट्रेनिंग, बेहतर प्रदर्शन और नई स्किल पर जोर दिया जाएगा. सरकार चाहती है कि हर कर्मचारी का काम मापा जा सके और उसी के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाए.

किन्हें मिलेगा इस बढ़ोतरी का फायदा

यह नया वेतन आयोग राज्य सरकार के उन लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए काम करेगा, जिनकी सैलरी पिछले काफी समय से पुराने स्ट्रक्चर पर आधारित थी.आयोग का मुख्य काम कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में ऐसी बढ़ोतरी की सिफारिश करना है, जो कर्मचारियों के लिए फायदेमंद हो और राज्य के खजाने पर भी बोझ न बने.

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किन कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा यह आयोग

हालांकि, इस आयोग में ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी शामिल नहीं होंगे. इसके अलावा कॉलेज प्रोफेसरों , मेडिकल और तकनीकी संस्थानों में काम करने वाले ऐसे कर्मचारी जिनकी सैलरी यूजीसी या एआईसीटीई स्केल पर तय होती है, उन्हें भी इसमें शामिल नहीं किया गया है. न्यायिक सेवा के अधिकारी भी इस दायरे से बाहर रहेंगे.

राज्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर होगा फैसला

सरकार ने साफ किया है कि सैलरी बढ़ाने का फैसला राज्य की आय, खर्च और कर्ज को ध्यान में रखकर किया जाएगा. आयोग भविष्य के खर्च और बजट पर असर का भी आकलन करेगा. जरूरत होने पर सैलरी बढ़ोतरी को चरणों में लागू करने की सलाह दी जा सकती है.

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यह फैसला असम के लाखों सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए राहत और उम्मीद लेकर आया है. आने वाले समय में इस पर नजर रहेगी कि सैलरी और पेंशन में कितना बदलाव होता है और इसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था और लोगों की आय पर कैसा पड़ता है.

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