बॉलीवुड के दिग्गज लेखक जावेद अख्तर ने ‘शोले', ‘दीवार' और ‘जंजीर' जैसी कई यादगार फिल्मों की कहानी लिखी है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने एक समय स्क्रीनप्ले और कहानी लिखने से लंबा ब्रेक ले लिया था. IMDb की ट्रिविया के मुताबिक, जावेद अख्तर ने 1989 में आई फिल्म ‘मैं आजाद हूं' के बाद करीब 14 साल तक किसी फिल्म की कहानी नहीं लिखी. इसके बाद उन्होंने साल 2004 में अपने बेटे फरहान अख्तर की फिल्म 'लक्ष्य' के जरिए बतौर लेखक वापसी की. हालांकि यह वापसी उतनी सफल नहीं रही, जितनी उम्मीद की जा रही थी.
14 साल बाद राइटर के रूप में की वापसी
IMDb ट्रिविया के अनुसार, जावेद अख्तर की आखिरी लिखी हुई फिल्म ‘मैं आजाद हूं' थी, जो 1989 में रिलीज हुई थी. इसके बाद उन्होंने गाने लिखने पर ज्यादा ध्यान दिया और कई सुपरहिट गाने लिखे. साल 2004 में उन्होंने फिर से कहानी और स्क्रिप्ट राइटिंग में वापसी की. इस बार उन्होंने अपने बेटे फरहान अख्तर की फिल्म ‘लक्ष्य' की कहानी लिखी. फिल्म में ऋतिक रोशन, प्रीति जिंटा और अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे.
अच्छी कहानी के बावजूद फ्लॉप रही फिल्म
‘लक्ष्य' एक युवा लड़के की कहानी थी, जो जिंदगी में अपना मकसद खोजते हुए भारतीय सेना का हिस्सा बनता है. फिल्म को आलोचकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली और समय के साथ इसे कल्ट फिल्मों में गिना जाने लगा. लेकिन रिलीज के समय दर्शकों ने इसे उम्मीद के मुताबिक पसंद नहीं किया. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और जावेद अख्तर की लेखक के रूप में वापसी फीकी रह गई. बाद के वर्षों में टीवी और ओटीटी पर फिल्म को नई पहचान मिली और आज इसे ऋतिक रोशन के बेहतरीन अभिनय वाली फिल्मों में गिना जाता है.
दिलचस्प बात यह है कि जिस फिल्म से जावेद अख्तर ने 14 साल बाद लेखन में वापसी की, वही फिल्म आज दर्शकों के बीच काफी पसंद की जाती है. हालांकि बॉक्स ऑफिस पर यह कमाल नहीं दिखा सकी, लेकिन समय के साथ इसकी लोकप्रियता बढ़ती चली गई.
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