विज्ञापन

दशहरा पर जरूर सुनें 1974 की फिल्म का ये राम भजन, 4 भाइयों की आवाज में गूंजती है प्रभु श्रीराम की महिमा

दशहरा 20 अक्तूबर को है. इस मौके पर हम आपके लिए एक खास राम भजन लाए हैं जिसमें चार भाइयों की आवाज गूंजती है और ये गाना बहुत ही कमाल का है जो जीवन का बड़़ा संदेश आसान भाषा में देता है.

दशहरा पर जरूर सुनें 1974 की फिल्म का ये राम भजन, 4 भाइयों की आवाज में गूंजती है प्रभु श्रीराम की महिमा
52 साल पुराना वो राम भजन जो हर दशहरा पर होने लगता है वायरल
youtube

हिंदी सिनेमा में कुछ ऐसे गीत हैं, जो मनोरंजन से आगे बढ़कर जीवन का दर्शन समझाते हैं. 52 साल पुराना 'जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को' ऐसा ही भजन है, जिसे सुनते ही मन में शांति, विश्वास और समर्पण का भाव जाग उठता है. भगवान राम की शरण में मिलने वाले सुख को बयां करता यह गीत आज भी भक्ति संगीत के प्रेमियों के बीच खास जगह रखता है. इस भजन की सबसे बड़ी खूबी इसके सरल शब्द हैं, जो जीवन की परेशानियों से जूझ रहे इंसान को उम्मीद का सहारा देते हैं. फिर दशहरा के मौके पर यह एकदम परफेक्ट सॉन्ग है. 

यह भी पढ़ें | दीवाली पर 39 साल बाद फिर अधर्मियों के विनाश के लिए लौटेंगे राम और सीता, दीपिका चिखलिया-अरुण गोविल के रियूनियन

'जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को' साल 1974 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘परिणय' का भजन है. इसके संगीतकार जयदेव, गीतकार रामानंद शर्मा और गायक शर्मा बंधु (चार भाई) हैं. 'परिणय' में रोमेश शर्मा और शबाना आजमी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए. फिल्म का निर्देशन रोमेश शर्मा ने किया था. यह फिल्म अपने दौर के उन सिनेमाई प्रयासों में गिनी जाती है, जिनमें मनोरंजन के साथ सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी जगह मिली.

यह भी पढ़ें | दीवाली का 65 साल पुराना गाना, उजड़ा हुआ गुलशन, बाहर उजाला, मगर दिल में है अंधेरा, मुकेश की आवाज

इस भजन को संगीतकार जयदेव ने अपनी संवेदनशील संगीत शैली से सजाया. जयदेव हिंदी फिल्म संगीत के ऐसे रचनाकार थे, जिनकी पहचान धुनों की सादगी, भावनात्मक गहराई और शब्दों के अनुरूप संगीत रचने की क्षमता से बनी. उनके संगीत में दिखावे के बजाय भावनाओं को प्रमुखता मिलती थी. शर्मा बंधुओं की गायकी इस गीत की आत्मा है. उनकी आवाज में भक्ति और विनम्रता का भाव गीत के संदेश को प्रभावशाली बनाता है. रामानंद शर्मा के लिखे शब्द भी आम बोलचाल के करीब हैं...

जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को
मिल जाये तरुवर कि छाया
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है
मैं जबसे शरण तेरी आया, मेरे राम

भटका हुआ मेरा मन था कोई
मिल ना रहा था सहारा
लहरों से लड़ती हुई नाव को
जैसे मिल ना रहा हो किनारा, मिल ना रहा हो किनारा
उस लड़खड़ाती हुई नाव को जो
किसी ने किनारा दिखाया
ऐसा ही सुख ...

इस भजन की लोकप्रियता का आधार सिर्फ इसकी धुन नहीं, बल्कि इसका संदेश है. जिंदगी में मुश्किलें हर दौर में आती हैं, लेकिन उम्मीद और विश्वास इंसान को उनसे लड़ने की ताकत देते हैं. जयदेव का संगीत, रामानंद शर्मा के शब्द और शर्मा बंधुओं की भावपूर्ण आवाज मिलकर यही एहसास पैदा करते हैं.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Dussehra 2026, Ram Bhajan, Hindi Songs, Entertainment
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com