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ममता बनर्जी का इस्तीफा देने से इनकार, राम गोपाल वर्मा और अशोक पंडित ने बताया 'लोकतंत्र पर हमला'

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी हार के बाद भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने पर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की आलोचना तेज हो गई है.

ममता बनर्जी का इस्तीफा देने से इनकार, राम गोपाल वर्मा और अशोक पंडित ने बताया 'लोकतंत्र पर हमला'
ममता बनर्जी का इस्तीफा देने से इनकार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी हार के बाद भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने पर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की आलोचना तेज हो गई है. फिल्म निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा और फिल्म निर्माता-सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने ममता बनर्जी की हठधर्मिता की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र पर हमला बताया. राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “राजनीति में इतने दशकों और मुख्यमंत्री के रूप में 15 साल बिताने के बाद, मुझे यकीन नहीं हो रहा कि ममता बनर्जी इस बात को नजरअंदाज कर रही हैं कि लोकतंत्र के डीएनए में ही संस्थाएं होती हैं और उन पर हमला करना असल में लोकतंत्र पर हमला करने जैसा है.”

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उन्होंने ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं का सम्मान जरूरी है. चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री का इस्तीफा देना लोकतांत्रिक परंपरा है, लेकिन ममता बनर्जी इसे नजरअंदाज कर रही हैं, जो गलत है.

दूसरी ओर, देश के मुद्दों को लेकर मुखर रहने वाले फिल्म निर्माता व सोशल एक्टिविस्ट अशोक पंडित ने इंस्टाग्राम पर ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, “ममता बनर्जी को सत्ता में रहते हुए किए गए अपराधों के लिए गिरफ्तार करके जेल में डाल देना चाहिए. वह हिंदुओं की हत्या, दुष्कर्म, नरसंहार और पलायन के लिए जिम्मेदार हैं. उनकी आपराधिक सोच के कारण इंसानों के बीच उनकी मौजूदगी समाज के लिए खतरनाक है. उन्हें गंभीर मेडिकल मदद की भी जरूरत है.”

अशोक पंडित ने ममता बनर्जी पर सांप्रदायिक हिंसा और हिंदू समुदाय के खिलाफ अत्याचार का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ममता की नीतियों के कारण राज्य में हिंसा और पलायन बढ़ा है. बंगाल चुनाव के परिणामों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 206 सीटें हासिल कीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस मात्र 81 सीटों पर सिमट गई. खुद ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट पर भाजपा के सुवेंदु अधिकारी से 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हार गईं. ऐसे में उनकी आलोचना हो रही है. लोगों का कहना है कि इसके बाद भी ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का फैसला लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. जनता के जनादेश को स्वीकार करते हुए ममता बनर्जी को लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करना चाहिए है.
 

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