Delhi: इन दिनों हर किसी का पसंदीदा शो बन चुका 'राख' (Raakh) बीते दिनों ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज हुआ था. एक क्राईम थ्रिलर सीरीज राख में अली फजल ने सब इंस्पेक्टर जयप्रकाश जाटव का किरदार निभाया है. शो का फर्स्ट लुक रिवील होने के बाद इसे देखने के लिए लोग बेताब थे, क्योंकि सत्य घटना पर आधारित शो में रंगा-बिल्ला के अपराधों की कहानी दिखाई गई है, जिनके अपराधों से साल 1978 पूरा दिल्ली हिल गया था.
'लोगों के दिमाग में अभी भी रंगा-बिल्ला घुसे हुए हैं'
एक्टर राकेश बेदी ने शो राख को लेकर कहा कि यह दिमाग में हिट करने वाली एक सीरीज है. शो को बहुत पसंद किया जा रहा है. यह एक सच्ची घटना पर आधारित है. हमारे देश में जो पुराने लोग हैं, उनके दिमाग में अभी भी रंगा-बिल्ला घुसे हुए हैं और इस शो में भी रंगा बिल्ला की कहानी दिखाई गई है. शो को बहुत अच्छे तरीके से डायरेक्ट किया गया है और शो की सारी कास्ट में बहुत अच्छा काम किया है.
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'धुरंधर 3' की हो रही चर्चा को बताया हवा-हवाई
राकेश बेदी ने कहा कि हमारे देश में काफी ऐसे केस हैं, जो लंबे समय तक चलते हैं. लेकिन कुछ केस ऐसे भी होते हैं, जिनमें सरकार डायरेक्ट हस्तक्षेप रखती है. सरकार के कारण वो केस जल्दी भी खत्म हो जाते हैं. इसके अलावा आम केस की बात करूं तो उनके फैसले जब आते हैं, तब वो लोगों के दिमाग से गायब हो जाते हैं. मेरा मानना है कि अगर अपराध 'घिनौना' किया है तो सजा भी 'घिनौनी' मिलनी चाहिए.
अहम रोल में हैं सोनाली बेंद्रे, अली फजल और राकेश बेदी
शो की कास्ट की बात करें तो सोनाली बेंद्रे, अली फजल, आमिर बशीर अहम किरदार में नजर आए हैं. इनके अलावा राकेश बेदी ने भी एक अहम किरदार निभाया है. अगर दूसरे कलाकारों की बात करें तो आकाश मखिया, रामदीप यादव, रमनदीप यादव जैसे तमाम एक्टर्स दिखाई दिए हैं. शो की कहानी रंगा-बिल्ला के भयानक अपराधों से जुड़ी हुई है. शो में बताया गया है कि कैसे दो बच्चों को अकेला देख उनकी हत्या कर दी जाती है.
1978 में सुर्खियों में आया था रंगा-बिल्ला का भयानक केस
शो में रंग-बिल्ला के सारे अपराधों को बहुत ही गहराई से दिखाया गया है. शो देखने के बाद दर्शकों की रूह कांप गई थी. रंगा-बिल्ला का यह भयानक केस साल 1978 में सुर्खियों में आ गया था. जहां दिल्ली में इन दोनों कुख्यात को लेकर चर्चाएं थीं. लोग अपने बच्चों को अकेले भेजने में डरने लगे थे. रंगा-बिल्ला का अंत बहुत ही भयानक हुआ, दोनों को फांसी दे दी गई और बुराई का अंत हुआ.
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