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'कराटे किंग' दूरदर्शन पर लाया था ऐसा सीरियल जो 39 साल बाद भी सुपरहिट, होमवर्क छोड़कर टीवी के सामने जम जाते थे बच्चे- पता है नाम

दूरदर्शन पर 18 मार्च 1987 को एक सीरियल का पहला एपिसोड एयर हुआ था. इसकी कहानियों ने पूरे देश के दिल में जगह बना ली और इस 11 साल के लड़के को देखने के लिए बच्चे होमवर्क भी मिस कर देते थे.

'कराटे किंग' दूरदर्शन पर लाया था ऐसा सीरियल जो 39 साल बाद भी सुपरहिट, होमवर्क छोड़कर टीवी के सामने जम जाते थे बच्चे- पता है नाम
दूरदर्शन का 39 साल पुराना वो सीरियल जो आज भी है सबका फेवरिट
नई दिल्ली:

दूरदर्शन की दुनिया भी कितनी कमाल थी. किताबों पर बने सीरियल. बनाने वाले भी कमाल और जीवन में कुछ सिखाने, ठहराव लाने और आगे बढ़ाने वाली बातें आया करती थीं. दूरदर्शन के दौर के कुछ सीरियल ऐसे भी हैं जो आज कर हमारे अंदर रचे-बसे हैं, और शायद ही हम उन्हें अपने अंदर से निकाल पाएं. एक ऐसा ही सीरियल 18 मार्च 1987 को दूरदर्शन पर हुआ था, जिसने लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड ही ध्वस्त कर दिए और इसका 11 साल का एक्टर देश की धड़कन बन गया. जानते हैं इस सीरियल का नाम.

जानते हैं दूरदर्शन के इस सीरियल का नाम

अगर नहीं तो लीजिए हम आपको बताए देते हैं. इस सीरियल का नाम है मालगुड़ी डेज. आर.के. नारायण की कहानियों पर आधारित यह सीरियल शंकर नाग के निर्देशन में बना था और आज भी भारतीय टेलीविजन का सबसे प्यारा, सबसे सच्चा और सबसे अनबिटेबल क्लासिक माना जाता है.

https://www.youtube.com/watch?v=aEjfHV0YbII

कराटे किंग थे डायरेक्टर

शंकर नाग को 'कराटे किंग' भी कहा जाता था क्योंकि कन्नड़ सिनेमा के अपने करियर में उन्होंने कई एक्शन फिल्में की थी. कन्नड़ भाषी होने के बावजूद इस सीरियल को उन्होंने हिंदी में बनाया, ताकि पूरे देश तक पहुंच सके. शूटिंग अगुम्बे (कर्नाटक) में हुई, जहां मालगुड़ी का वो छोटा-सा कस्बा जिंदा हो उठा. संगीत एल. वैद्यनाथन का, क्रेडिट्स में आर.के. लक्ष्मण का हाथ और कहानियां नारायण की वो सरल लेकिन गहरी दुनिया, सब कुछ मिलकर एक ऐसा नशा बना जो आज भी उतरता नहीं.

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11 साल के लड़के ने जीता दिल

लेकिन सबसे दिलचस्प कहानी है स्वामी के छोटे एक्टर मास्टर मंजुनाथ की. मात्र 11 साल के इस कन्नड़ बच्चे को हिंदी की एक भी शब्द नहीं आता था. वह पहले सिर्फ कन्नड़ फिल्मों में काम कर चुका था. शूटिंग के दौरान टीम में भी हिचकिचाहट थी. लेकिन शंकर नाग को मंजुनाथ पर पूरा भरोसा था. मंजुनाथ ने सारे डायलॉग रटकर याद किए, भाव और एक्सप्रेशन से इतना जीवंत कर दिया कि स्वामी सचमुच हर घर का बच्चा बन गया. आज भी कहा जाता है कि स्वामी देखकर लगा जैसे हमारा ही बचपन स्क्रीन पर चल रहा हो.

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39 साल पुरानी विरासत आज भी जिंदा

सीरियल में अनंत नाग जैसे दिग्गज कलाकार भी थे, जो अलग-अलग एपिसोड में नजर आए. इस सीरीज ने दूरदर्शन के सुनहरे दौर को और चमकाया. उस समय टीवी पर सिर्फ एक चैनल होता था, लेकिन मालगुड़ी डेज़ देखने के लिए बच्चे सब कुछ भूल जाते थे, खेल-कूद, होमवर्क, सब. आज 39 साल बाद भी यह सीरियल बेजोड़ है. शंकर नाग का 35 वर्ष की उम्र में 1990 में एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया. लेकिन उन्होंने जो विरासत छोड़ी, वो आज भी जिंदा है.

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