सुरैया से जुदा होकर देवानंद शायद टूट ही गए होते अगर उनकी जिंदगी में एक हसीना की एंट्री नहीं होती. वो शायद खुश मिजाज और एवर ग्रीन एक्टर भी न होते अगर उनकी जिंदगी में वो हसीना नहीं होती जिसने बॉलीवुड में एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया. उनका फिल्मी करियर बेहद छोटा रहा. लेकिन हमेशा के लिए यादगार और मिसाल बन गया. हिंदी सिनेमा के शिखर पर पहुंच कर इस हसीना ने देवानंद संग घर बसा लिया और उनकी जिंदगी को भी हसीन बना दिया. ये हसीना हैं कल्पना कार्तिक.
मोना से फिल्मी दुनिया तक का सफर
कल्पना कार्तिक का असली नाम मोना था. जब उन्होंने फिल्मों में कदम रखा तो देव आनंद के बड़े भाई और मशहूर निर्देशक चेतन आनंद ने उनका नाम बदलकर कल्पना कार्तिक रख दिया. 19 सितंबर 1931 को लाहौर में जन्मी कल्पना एक पढ़े लिखे क्रिश्चियन परिवार से थीं. बंटवारे के बाद उनका परिवार शिमला आकर बस गया. पढ़ाई के दौरान उन्होंने मिस शिमला कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया. जहां चेतन आनंद की नजर उन पर पड़ी. दिलचस्प बात ये थी कि चेतन आनंद की पत्नी उमा आनंद, कल्पना की चचेरी बहन थीं. परिवार की रजामंदी के बाद कल्पना नवनिकेतन फिल्म्स से जुड़ीं और शिमला छोड़कर मुंबई आ गईं. साल 1951 में फिल्म ‘बाजी' से उन्होंने डेब्यू किया और देव आनंद के अपोजिट नजर आईं. पहली ही फिल्म से उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया.

देव आनंद के साथ प्यार, शादी
कल्पना कार्तिक ने अपने करियर में कुल छह फिल्में कीं और सभी देव आनंद के साथ थीं. ‘बाजी', ‘आंधियां', ‘हमसफर', ‘टैक्सी ड्राइवर', ‘हाउस नंबर 44' और ‘नौ दो ग्यारह' जैसी फिल्मों में उनकी जोड़ी खूब पसंद की गई. इसी दौरान दोनों एक दूसरे के प्यार में पड़ गए. देव आनंद पहले ही एक टूटे दिल के दौर से गुजर चुके थे. लेकिन कल्पना के साथ उन्हें सुकून मिला. साल 1954 में दोनों ने फिल्म ‘टैक्सी ड्राइवर' के सेट पर लंच ब्रेक के दौरान गुपचुप शादी कर ली. शादी के बाद कल्पना ने फिल्मों को अलविदा कह दिया और पूरी तरह परिवार की हो कर रह गईं.

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