भारतीय संगीत जगत में अपनी मीठी और जादुई आवाज से पहचान बनाने वाली पार्श्व गायिका शारदा राजन अयंगर को लोग आज भी सिर्फ 'शारदा' के नाम से याद करते हैं. 1960 और 70 के दशक में उन्होंने अपने गानों से हर दिल में खास जगह बनाई थी. उनके करियर की शुरुआत किसी फिल्मी स्टूडियो से नहीं, बल्कि ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाली भारतीय पार्टियों से हुई थी. आज वह बॉलीवुड की जानी मानी सिंगर हैं, जिनका एक गाना आज बच्चों के बीच काफी पॉपुलर है. हालांकि इस गाने को कनेक्शन 43 साल पुराने गीत से है, जिसमें वैजयंती माला और मुमताज नजर आई थीं.
43 साल पुराने गाने का कनेक्शन
हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वह 1966 में आई फिल्म सूरज का तितली उड़ी गाना है, जिसमें राजेंद्र कुमार, वैजयंती माला और मुमताज लीड रोल में थे. फिल्म के गाने के लिरिक्स इस प्रकार है....
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तितली उड़ी उड़ जो चली
फूल ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश
तितली उड़ी उड़ जो चली
फूल ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश
खिले हैं गगन में तारों के जो फूल
वहीं मेरी मंज़िल कैसे जाऊँ भूल
जहां नहीं बंधन ना कोई दीवार
जाना है वहाँ मुझे बादलों के पार
तितली उड़ी उड़ जो चली
फूल ने कहा आजा मेरे पास
तितली कहे मैं चली आकाश
बच्चों के वर्जन के बोल
तितली उड़ी, उड़ ना सकी
बस में चढ़ी, सीट ना मिली
सीट ना मिली, रोने लगी
कंडक्टर बोला, "आजा मेरे पास"
तितली बोली, "चल बदमाश, चल बदमाश
मेरा घर है पास, मेरा घर है पास, चल बदमाश!
राज कपूर ने दिया था मुंबई आने का न्योता
शारदा का जन्म 25 अक्टूबर 1933 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ था. बचपन से ही उन्हें संगीत का शौक था. वह हिंदी गानों को तमिल में लिखती थीं और गुनगुनाती रहती थीं. यही शौक धीरे-धीरे उनकी दीवानगी बन गया. बाद में उनका परिवार तेहरान चला गया, जहां वह भारतीय समुदाय की पार्टियों में गाना गाती थीं. तेहरान में एक बड़े फिल्म वितरक श्रीचंद आहुजा ने राज कपूर के लिए पार्टी रखी थी, जिसमें शारदा ने गाने गाए थे. शारदा की आवाज सुनकर राज कपूर इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मुंबई आने का न्योता दे दिया. राज कपूर ने मुंबई आने पर शारदा को शंकर-जयकिशन के शंकर से मिलवाया. शारदा ने उस्ताद जगन्नाथ प्रसाद और गायक मुकेश से भी संगीत की शिक्षा ली. शारदा ने 1966 में फिल्म 'सूरज' से बॉलीवुड में कदम रखा. इस फिल्म का गाना 'तितली उड़ी, उड़ जो चली' सुपरहिट रहा, जो आज भी लोगों की जुबान पर है. इस गाने ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया.
शारदा का करियर
'तितली उड़ी, उड़ जो चली' के बाद उन्होंने 'गुमनाम', 'शतरंज,' और 'अराउंड द वर्ल्ड' जैसी कई फिल्मों में यादगार गाने गाए. 1969 से 1972 तक वह लगातार फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुईं. अपने करियर में शारदा ने मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश, आशा भोसले और के.जे. येसुदास जैसे दिग्गजों के साथ गाने गाए. उन्होंने वैजयंतीमाला, साधना, हेमा मालिनी, रेखा, शर्मिला टैगोर और मुमताज जैसी अभिनेत्रियों को अपनी आवाज दी. 1971 में उन्होंने 'सिजलर्स' नाम से पॉप एल्बम रिकॉर्ड किया, जो किसी भारतीय महिला गायिका का पहला पॉप एल्बम था. 2007 में उन्होंने मिर्जा गालिब की गजलों पर आधारित एल्बम 'अंदाज-ए-बयां' रिलीज किया. 1986 में फिल्म 'कांच की दीवार' में उन्होंने आखिरी बार फिल्मों के लिए गाना गाया। करीब 20 साल के करियर में उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई.
लता मंगेशकर और आशा भोंसले के दबदबे में छाईं शारदा
कहा जाता है कि 'तितली उड़ी' की सफलता के बाद ही फिल्मफेयर ने मेल और फीमेल प्लेबैक सिंगर के लिए अलग-अलग अवॉर्ड देना शुरू किया था. उस समय ऐसा होता था कि प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायन के लिए एक ही श्रेणी थी (या तो किसी पुरुष या किसी महिला को मिलता), लेकिन मोहम्मद रफी के "बहारों फूल बरसाओ" के साथ "तितली उड़ी" को समान वोट प्राप्त हुए. पुरस्कार तो मोहम्मद रफी को ही मिला, लेकिन उन्हें इस कीर्तिमान के लिए एक विशेष पुरस्कार दिया गया. अगले वर्ष से महिला और पुरुष के लिये अलग-अलग श्रेणी बना दी गई. फिर उन्हें लगातार 4 वर्षों के लिए नामांकित किया गया, जब दोनों बहनें लता मंगेशकर और आशा भोंसले का दबदबा था. शारदा ने बॉलीवुड के अलावा तेलुगू, मराठी, इंग्लिश और गुजराती भाषाओं में भी गाने गाए. 14 जून 2023 को कैंसर की बीमारी के चलते शारदा राजन अयंगर का मुंबई में निधन हो गया था.
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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं