Bhooth Bangla Review: अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी 14 साल बाद लौटी है. एक साथ आने के लिए जॉनर भी चुना तो हॉरर कॉमेडी, जो इन दिनों खूब पसंद किया जा रहा है. इन दोनों के साथ आने से उम्मीद जगी थी कि दोनों भूल भुलैया लेकर आए थे तो इस बार भी कुछ बड़ा करेंगे. लेकिन ट्रेलर आते ही पूत के पांव पालने में दिख गए थे और अब फिल्म देखी तो समझ में आ गया कि ये तो ऊंची दुकान और फीके पकवान वाली बात है. वैसे भी जब से ट्रेलर रिलीज हुआ है तो मेरी जुबान पर भूत बंगला कम बार-बार भूल भुलैया ही निकल आता है.
अब आए भी क्यों ना, पूरा सेटअप वैसा ही था, कलाकारों की झलक भी वैसी ही मिल रही थी और तो और कुछ सीक्वेंस भी वैसे ही नजर आ रहे थे. उस समय लगा कि मेरी गलतफहमी हो सकती है क्योंकि ज्यादा फिल्में देख ली हैं तो ऐसे में ज्यादा दिमाग चला रहा हूं. सोचा चलो फिल्म देखने का वेट करते हैं. अब जब फिल्म देखी और रिव्यू करने बैठा तो एक अजीब सा खौफ दिमाग में बैठ गया और यही सोच रहा हूं कि अक्षय कुमार और प्रियदर्शन के डेडली कॉम्बिनेशन ने कैसे पौने तीन घंटे में दिमाग को ही डेड कर दिया है. आइए जानते हैं कैसी है फिल्म.

अक्षय कुमार और प्रियदर्शन को क्या लगा कि हॉरर कॉमेडी जॉनर के नाम पर कुछ भी दिखाया जा सकता है. वो भी जब हमारे सामने भूल भुलैया, स्त्री और भूल भुलैया 2, 3 जैसी फिल्में हैं. तो ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों क्या नया लेकर आएंगे. तो फिल्म देखने के बाद जो नतीजा निकला वो शून्य था. कहानी एक भुतहा हवेली की. जिसमें बहन के बहाने से मजबूरी का एंगल लाया गया है. लेकिन ना तो भाई-बहन की कहानी और ना ही भुतहा हवेली की दास्तान ही इम्प्रेस कर पाती है.
बहुत ही पुरानी टाइप की कहानी. दिमाग पर हथोड़े की तरह वार करने वाले जोक्स. फिर सधे हुए कलाकारों से बेसिरपैर का मजाक करवाना. आखिर प्रियदर्शन से ऐसी उम्मीद तो नहीं थी. वैसे फिल्म को देखकर आखिर में यही ख्याल आता है कि अगर कहानी ना हो तो प्लीज कोशिश ना करें क्योंकि इन दिनों सिनेमाघरों में 8-10 करोड़ में बनी, युवा सितारों वाली साउथ की फिल्में बड़ा चमत्कार कर रही हैं.

अक्षय कुमार को थोड़ा एक्टिंग और चीजों को सीरियस लेने की जरूरत है. हर फिल्म के साथ दर्शकों के धैर्य की परीक्षा नहीं ली जा सकती है. एक्टिंग में अक्षय कुमार बहुत ज्यादा लाउड है. भूल भुलैया (ओह सॉरी, भूत बंगला) में वो अक्षय दिखते ही नहीं हैं जो भूल भुलैया में नजर आए थे. वामिका गब्बी के होने ना होने से फिल्म को कोई फर्क नहीं पड़ता. अक्षय कुमार के साथ उनका दिखना, बिल्कुल ही बेमजा है. राजपाल यादव और परेश रावल बढ़िया हैं. असरानी को परदे पर आखिरी बार देखना यादगार है. तब्बू भी ठीक है, और बाकी सब भुतहा है.
प्रियदर्शन अगर ऐसी ही फिल्में बनाने का इरादा रख रहे हैं तो प्लीज रुक जाइए. ऐसी फिल्में बनाने से अच्छा है कुछ देर और ठहर जाइए. उनको ये सोचना चाहिए कि भूल भुलैया का खुमार अभी तक हमारे सिर से उतरा नहीं है और ऐसे में भूल बंगला दिखाना, दिल के टुकड़े हजार कर देता है. फिल्म देखकर कहीं नहीं लगता कि ये फिल्म प्रियदर्शन की है.

भूत बंगला को लेकर हमारा फाइनल वर्डिक्ट तो यही है कि ना तो ये डराती है, ना ही हंसाती, सिर्फ पकाती है और सोचने पर मजबूर करती है कि अक्षय कुमार क्या ऐसे ब्लॉकबस्टर दोगे. वैसे भी फिल्म देखने के बाद मेरे दिमाग में तो यही आया कि अक्षय-प्रियदर्शन का तो अब सिर्फ रामजी आके ही भला करेंगे.
रेटिंग: 1.5/5 स्टार
डायरेक्टर: प्रियदर्शन
कलाकार: अक्षय कुमार, वामिका गब्बी, परेश रावल, असरानी, तब्बू और राजपाल यादव
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