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62 साल पुराना वो सदाबहार गाना, शर्मीला बनीं 'कश्मीर की कली' पंजाबी मुंडा बने शम्मी कपूर, कश्मीर की वादियों में गूजीं रफी-आशा की आवाज

62 साल पहले रिलीज हुई फिल्म कश्मीर की कली का सदाबहार गाना आज भी अपने रोमांस और खूबसूरत वादियों की याद दिलाता है. शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर की शानदार केमिस्ट्री, कश्मीर की वादियों में गूंजी मोहम्मद रफी और आशा भोसले की सुरीली आवाज मे बना एवरग्रीन.

62 साल पुराना वो सदाबहार गाना, शर्मीला बनीं 'कश्मीर की कली' पंजाबी मुंडा बने शम्मी कपूर, कश्मीर की वादियों में गूजीं रफी-आशा की आवाज
62 साल पुराना गाना, शम्मी- शर्मिला का रोमांस, कश्मीर की वादियों में बना यादगार
kashmir
नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में हर तरह के गाने बनते हैं. लेकिन आज हम एक ऐसे गाने की बात करेंगे, जिनको सुनते ही आंखों के सामने खूबसूरत नजारे आ जाते हैं और पुराने समय का रोमांस घूमने लगता है.  शर्मिला टैगोर और शम्मी टैगोर ने अपने समय में कई हिट फिल्में और गानें दिए, जो उस समय के रोमांस को बेहद ही खूबसूरती से दिखाते हैं. आज उन्हीं की फिल्म के एक गाने की हम बात करने वाले हैं. जिसमें शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर की जोड़ी, प्यार भरे अंदाज और कश्मीर की खूबसूरत वादियों ने इस गाने को और खास बना दिया है. उस दौर में पर्दे पर दिखने वाला रोमांस आज भी दर्शकों को अपनी ओर खींचता है. यही वजह है कि छह दशक से ज्यादा समय होने के बाद भी इस फिल्म और गाने की चर्चा होती है. 

मोहम्मद रफी और आशा भोसले की आवाज का जादू

हम बात कर रहे हैं साल 1964 में आई फिल्म 'कश्मीर की कली' के गाने 'हाय रे हाय ये मेरे हाथ में तेरा हाथ' हो गाना, इस खूबसूरत गाने के बोल एस.एच. बिहारी ने लिखे थे, गाने का संगीत ओ.पी. नैय्यर ने तैयार किया था और गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी. इस गीत में दोनों सिंगर्स की आवाजें शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर के रोमांटिक अंदाज के साथ कश्मीर की खूबसूरत वादियों ने इस गाने को यादगार बना दिया. गाने में शर्मिला टैगोर ने कश्मीरी लिबाज पहने थे और वहीं शम्मी कपूर पंजाबी लुक में नजर आए थे. इस गाने में शम्मी और शर्मीला का चुलबुलेपन ने इसे खास बना दिया है. गाने के बोल इस तरह हैं-

हाए रे हाए, ये मेरे हाथ में तेरा हाथ, नए जज़्बात, मेरी जाँ बल्ले बल्ले!
ओए ओए होए ओए ओए ओए
हाए रे हाए, यही जज़्बात रहें दिन रात, तो फिर क्या बात, मेरी जाँ बल्ले बल्ले!
ओए ओए होए ओए ओए ओए
तेरी आँखों में भी, अरे, वो जादू है
जब से आँख मिली है, दिल बेक़ाबू है
ख़ुद को खो कर तुझको पाया, क्या मेरी तक़दीर है!
हाए रे हाए, यही जज़्बात रहें दिन रात... मेरी जाँ बल्ले बल्ले!

कश्मीर की वादियों में शूट हुई थी 'कश्मीर की कली'

फिल्म 'कश्मीर की कली' का निर्देशन शक्ति सामंता ने किया था. इस गाने की खासियत थी इसकी लोकेशन. फिल्म में कश्मीर के प्राकृतिक नजारों को खास अंदाज में दिखाया गया. गाने में शर्मीला टैगोर कश्मीरी कली बनीं तो वहीं शम्मी कपूर ने पंजाबी मुंडे के लुक में नजर आए थे. फिल्म के दूसरे कई गाने भी काफी पसंद किए गए थे. फिल्म का गाना 'तारीफ करूं क्या उसकी' डल झील के शांत पानी पर शूट किया गया था. शम्मी कपूर ने फिल्म में राजीव लाल और शर्मिला टैगोर ने चंपा का किरदार निभाया था. दोनों की जोड़ी ने पर्दे पर रोमांस को एक चुलबुला अंदाज दिया. कश्मीर के खूबसूरत नजारों के बीच फिल्माए गए सीन्स ने कहानी के प्यार भरे माहौल को और भी यादगार बना दिया.

फिल्म के संगीत से जुड़ा दिलचस्प ट्रिविया

'कश्मीर की कली' फिल्म साल 1964 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म में प्राण, नाजिर हुसैन, अनूप कुमार, धूमल, मदन पुरी और टुन टुन ने भी अभिनय किया था. फिल्म के साउंडट्रैक में 9 गाने थे, जिसका संगीत ओ. पी. नैय्यर ने तैयार किया और एस. एच. बिहारी के फिल्म के सभी गाने लिखे थे. जैसे 'तारीफ करूं क्या उसकी', 'दीवाना हुआ बादल', 'इशारों इशारों में दिल लेने वाले' और 'है दुनिया उसी की' जैसे गाने शामिल हैं. इन सभी गानों को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने अपनी आवाज से सजाया था. 

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