विनोद खन्ना हिंदी सिनेमा के हैंडसम एक्टर्स में से एक माने जाते हैं. अमिताभ बच्चन जैसी कद-काठी, चार्मिंग चेहरा और प्यारी सी स्माइल कुल मिलाकर उनमें एक रोमांटिक हीरो कहलाने का हर एक गुण था लेकिन विनोद खन्ना को शुरुआत में इस नजर से देखा ही नहीं गया. वह फिल्मों में काम कर रहे थे. हिट फिल्में भी दे रहे थे. उनके अपोजिट अच्छी अच्छी एक्ट्रेसेज को भी कास्ट किया जाता था लेकिन किसी को उनमें वो रोमांटिक हीरो वाला करिश्मा नहीं दिख रहा था. लेकिन एक गाना था जिसने विनोद खन्ना की इमेज बदल दी.
फ्लॉप फिल्म के एक गाने ने बदली विनोद खन्ना की इमेज
Imdb पर मौजूद ट्रीविया के मुताबिक आर डी बर्मन का एक गाना था जिसने एक्टर को लेकर फिल्म मेकर्स की नजर बदली. ये गाना साल 1972 में आई फिल्म 'परछाइयां' में था. विनोद खन्ना और रेशमा पर फिल्माया गया ये गाना था 'सांसों में कभी'. इस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने गाया था. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी लेकिन इस एक गाने से विनोद खन्ना के रोमांटिक स्किल्स दर्शकों की नजरों में आए और उनके इस अंदाज को बहुत पसंद किया गया.
अमिताभ बच्चन के स्टारडम को दी थी टक्कर
विनोद खन्ना को लेकर कहा जाता है कि अगर वो 80 के दशक के शुरुआती दौर में फिल्मों से टेम्पररी रिटायरमेंट ना लेते तो वे अमिताभ बच्चन के स्टारडम को टक्कर दे सकते थे. 1975-81 में विनोद खन्ना की सोलो हीरो ब्लॉकबस्टर फिल्मों में कैद (1975) और जालिम (1980), दोनों लीना चंदावरकर के साथ और इंकार (1977) विद्या सिन्हा के साथ, इसके बाद आप की खातिर (1977), खून की पुकार (1978), युवराज (1979), गरम खून (1980), लहू के दो रंग (1979), ताकत (1982) और जेल यात्रा (1981) शामिल हैं.
बिग बी की वजह से विनोद खन्ना के हाथ से गई थी दोस्ताना!
राज खोसला 'दोस्ताना' में पहले शत्रुघ्न सिन्हा वाले रोल के लिए विनोद खन्ना को लेना चाहते थे. लेकिन बाद में उन्होंने अपना फैसला बदल लिया और शत्रुघ्न सिन्हा को फाइनल किया. क्योंकि उन्हें लगा कि दर्शक यह नहीं मानेंगे कि जीनत अमान, अमिताभ के लिए विनोद खन्ना को ठुकरा देंगी. इससे आप समझ ही सकते हैं कि उस वक्त उनका स्टारडम किस लेवल का रहा होगा.
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