This Article is From Feb 04, 2021

ग्रेटा थनबर्ग : उम्र से कहीं बड़ा है नाम और काम

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रवीश कुमार

ग्रेटा थनबर्ग. उसका नाम उसका काम उसकी उम्र के साल से कहीं ज़्यादा बड़ा है. वह मिट्टी, हवा और पानी के हक को लेकर सारी दुनिया की सरकारों से लड़ने निकल पड़ी है. जलवायु को लेकर केवल नीति बनाने और काम न करने वाली हर सरकारों की आलोचना करती है. उसकी वफ़ादारी हवा और पानी से है. उसकी बहादुरी की कोई सीमा नहीं. वर्ना 16 साल की उम्र में 13 दिन 8 घंटे तक अटलांटिक महासागर के थपेड़ों का सामना करना हर किसी के बस की बात नहीं है. वह अपने पिता के साथ जान जोखिम में डाल लहरों का सामना करती रही. उसने लहरों से लोहा मोल ले लिया. ब्रिटेन से न्यूयार्क पहुंच गई. सिर्फ इतना बताने के लिए आकाश में उड़ते जहाज़ों के धुएं से धरती की हवा ख़राब हो रही है. इस साल ग्रेटा नोबेल शांति पुरस्कार के दावेदारों में से है. समंदर के बीच में अकेले रह कर अपने इरादों का इम्तहान देने वाली ग्रेटा के लिए हिन्दुस्तान से एक पैग़ाम है.

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि 300 ट्वीट को संज्ञान में लिया गया है जिसकी जांच होगी. पुलिस भले कहती है कि ग्रेटा के खिलाफ FIR नहीं हुई है. लेकिन पुलिस ये तो कहती है कि ग्रेटा ने अपने हैंडल से एक टूल किट अपलोड किया था. उसकी जांच हो रही है. देशद्रोह की धारा सेक्शन 124A, 153A, 153 और 120B के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है. इस टूल किट में ग्रेटा ने मंत्रियों को टैग करने, भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शन करने, मीडिया हाउस के बाहर प्रदर्शन की बात कही है. 

लेकिन भारतीय दूतावासों के बाहर तो नागरिकता कानून के विरोध के समय में भी प्रदर्शन हुए. किसान आंदोलन के समर्थन में भी प्रदर्शन हुए हैं. क्या टूल किट की जांच का मामला ग्रेटा से नहीं जुड़ता जिनके हैंडल से ट्वीट किया गया है? ग्रेटा ने आज भी ट्वीट किया है कि वह किसान आंदोलन के साथ है. इस एक कदम से भारत को लेकर और विवाद हो सकता है. सारी दुनिया के स्कूलों में इस बात की चर्चा होगी कि भारत में ग्रेटा के ट्व‍ि‍टर हैंडल से ट्वीट किए गए टूल किट की जांच हो रही है. इन खबरों के साथ किसान आंदोलन स्थल के चारों तरफ लगी कंटीली तारों और कीलों की भी तस्वीरें छपने लगेगीं. छप भी रही हैं.

दो साल पहले ग्रेटा के आह्वान पर भारत के कई शहरों में स्कूली छात्रों ने मानव श्रृंखला बनाई थी. भारत के कई स्कूल schoolstrikesforclimate का कार्यक्रम अपनाते हैं. भारत के कई छात्रों की प्रेरणा है ग्रेटा. स्वीडन ने ग्रेटा पर डाक टिकट निकाला है. भारत का स्वीडन के साथ अच्छा रिश्ता है. जब यह ख़बर वहां पहुंचेगी तो कैसी छवि बनेगी. स्वीडन के अखबारों में भारत के बारे में क्या छपेगा?

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जब से किसान आंदोलन दिल्ली आया है तभी से कुछ लोग जल्दी में हैं. इसे साज़िश बता रहे हैं, किसानों को आतंकवादी बता रहे हैं. वो इतनी जल्दी में हैं कि किसान आंदोलन स्थल के चारों तरफ कीलें गाड़ रहे हैं. इन कीलों को देखकर किसी को भी अंदाज़ा हो जाना चाहिए कि बात बात में किसानों की जय बोलने वाले लोग अब इस हद तक पहुंच गए हैं कि जो भी किसानों की जय बोलता है उन्हें आतंकवादी नज़र आने लगता है. इतनी कीलें और कांटे बिछा दिए गए हैं उन्हें अब किसान नज़र भी नहीं आते. वो कांटों को देखते देखते कांटों की तरह देखने लगे हैं. पुलिस के पास क्या सूचना है वो बेहतर समझती है लेकिन उसके इस कदम से जो नुकसान हुआ है उसे हम देख रहे हैं. जिस ग्लोबल छवि को बनाने के लिए अरबों रुपये फूंक दिए गए. दर्जनों यात्राएं की गईं उस ग्लोबल छवि को लोकल लेवल से खराब किया जा रहा है. ग्रेटा बहादुर लड़की है. उसके साथ दुनिया की लड़कियां खड़ी हो जाएंगी.

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