जैवविविधता देखनी हो तो पौधों को रोज निहारिए, नजर आएगा एक अनूठा संसार

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Vikram Singh

तो भैया, हम आक (Calotropis Procera) के पौधों को ऑब्जर्व करेंगे? लेकिन इस पर हमें क्या ही दिखेगा? इसे तो हमारे गांव वाले काटकर फेंक देते हैं. यह सवाल मुझसे आज से आठ साल पहले पूछा गया था, जब मैं राजस्थान के बीकानेर के एक स्कूल में एक महीने के लिए रुका था. मेरा मकसद था बच्चों को जैवविविधता से रूबरू करवाना. बच्चों को यह समझाना कि कुदरत कैसे काम करती है और किस तरह अलग-अलग प्रजातियां एक-दूसरे पर निर्भर होकर जीवित रहती हैं. मैं चाहता था कि यह सब बच्चों को उनके स्कूल के आसपास ही दिखाई दे. स्कूल शहर से काफी दूर खेतों के बीच बना हुआ था. आसपास रेतीली जमीन, खेत, खेजड़ी के पेड़ और बहुत सारे आक के पौधे थे. जुलाई की गर्मी के बीच मेरा ध्यान बार-बार आक के पौधों पर जा रहा था. मन में सवाल था- क्या सच में इस पौधे का कुदरत में कोई रोल है?

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फिर मैंने बारह बच्चों की एक टोली बनाई. उनका काम था रोज सुबह स्कूल शुरू होने से पहले एक घंटा आक के पौधों को ध्यान से देखना.''भैया, हम इन पर देखें क्या?'' यह लगभग हर बच्चे का सवाल था. मैंने उनसे कहा कि जो भी जीव - जैसे कीड़े, मकोड़े, पक्षी, छिपकलियां या कोई और इन पौधों पर दिखाई दें, उन्हें अपनी कॉपी में नोट करें. वे क्या कर रहे हैं, पौधे के किस हिस्से पर आते हैं, क्या खाते हैं- सब कुछ दर्ज करना है.

शुरुआत में बच्चों को ऑब्जर्व करने में दिक्कत हुई, क्योंकि उन्होंने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं किया था. लेकिन धीरे-धीरे उन्हें चींटियां, काले भंवरे, टिड्डे, बीटल्स और कई तरह के जीव दिखाई देने लगे. एक घंटे बाद जब सभी बच्चे वापस आते, तो बड़ी खुशी से बताते कि उन्होंने क्या-क्या देखा. कुछ जीव तो उन्होंने पहली बार देखे थे.

आक के पौधे का अवलोकन करते स्कूली छात्र.
Photo Credit: Vikram Singh

कैसे देखें अपने आसपास की दुनिया

महीने के आखिर में जब पूरी सूची बनाई गई, तो आक के पौधों पर कुल इक्कीस प्रजातियां पाई गईं. इनमें कुछ जीव पूरी तरह इस पौधे पर निर्भर थे, जैसे कुछ तितलियां और टिड्डे, जिनके लिए यह होस्ट प्लांट है. कुछ प्रजातियां अप्रत्यक्ष रूप से इस पौधे पर निर्भर थीं. उदाहरण के लिए, सनबर्ड अपने घोंसले बनाने के लिए इसके बीजों पर मौजूद रुई जैसे रेशों का इस्तेमाल करती है. वहीं स्टारलिंग जैसे पक्षी उन टिड्डों को खाते हैं, जो आक के पत्तों पर जीवित रहते हैं.

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इस पूरी प्रक्रिया से मुझे और खासकर बच्चों को, यह एहसास हुआ कि आक जैसा पौधा, जिसे अक्सर एक बेकार 'वीड' समझकर काट दिया जाता है, दरअसल कितनी प्रजातियों के जीवन का हिस्सा है. हमने तो सिर्फ सुबह के समय इस पौधे को देखा था. न जाने दोपहर, शाम और रात में कितने और जीव इस पर आते होंगे.

आक जैसे न जाने कितने पौधे हैं, जो इंसानों की नजर में शायद महत्वहीन हों, लेकिन कुदरत में उनका बहुत बड़ा योगदान है. अगर आपके घर के आसपास भी आक (मदार) का पौधा है तो कभी थोड़ा समय निकालकर उसे ध्यान से देखिए. शायद आपको भी उसके आसपास एक पूरी छोटी-सी दुनिया दिखाई दे जाए.

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(विक्रम सिंह एक प्रकृतिवादी हैं और जैव विविधता का अध्ययन करने में रुचि रखते हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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