महिला की शिकायत पर पटना निगरानी टीम की रेड, 25 की डील के बाद BCM 10000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए निगरानी विभाग से संपर्क किया और पूरे मामले को सामने रखा. यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है.

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नालंदा में निगरानी टीम की कार्रवाई
Bihar News:

भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखते हुए पटना से आई निगरानी विभाग की टीम ने गुरुवार (26 मार्च) को नालंदा जिले के नगरनौसा में बड़ी कार्रवाई की है. यहां निगरानी टीम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नगरनौसा में तैनात ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर (BCM) मनजीत प्रसाद को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. बताया जा रहा है कि BCM के खिलाफ निगरानी टीम से महिला परिवादी ने शिकायत की थी. जिस पर सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई कर रिश्वत लेते रंगे हाथ आरोपी BCM को पकड़ा गया है. 

आशा कार्यकर्ता की बहाली के लिए 25 हजार रुपये रिश्वत की मांग

जानकारी के अनुसार, आरोपी बीसीएम मनजीत प्रसाद आशा कार्यकर्ता की बहाली के नाम पर रिश्वत मांग रहा था. उसने पीड़िता बॉबी कुमारी से 25 हजार रुपये की मांग की थी. रिश्वत की मांग से परेशान होकर बॉबी कुमारी ने पटना स्थित निगरानी विभाग में इसकी शिकायत दर्ज कराई.

पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये

शिकायत के बाद विभाग ने मामले का सत्यापन कराया, जिसमें आरोप सही पाए गए. इसके बाद धावा दल का गठन कर जाल बिछाया गया. गुरुवार को जैसे ही पीड़िता ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये आरोपी को दिए, पहले से घात लगाए निगरानी टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी को अपने साथ पटना ले गई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है.

एक सप्ताह में भ्रष्टाचार पर दूसरा प्रहार

नगरनौसा में निगरानी विभाग की यह एक सप्ताह के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई है. इससे क्षेत्र के भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है. इससे पहले 20 मार्च को नगरनौसा के बीपीआरओ को छठ घाट की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 12 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था.

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महिला की हिम्मत बनी मिसाल

एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहारशरीफ में महिला सशक्तिकरण की बात कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर एक महिला ने आत्मनिर्भरता के साथ-साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाकर मिसाल पेश की है. पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए निगरानी विभाग से संपर्क किया और पूरे मामले को सामने रखा. यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है. बताया जा रहा है कि आरोपी लंबे समय से नौकरी के नाम पर वसूली का खेल चला रहा था. कई लोग उसके झांसे में आ चुके थे, लेकिन डर या मजबूरी के कारण आवाज नहीं उठा पाए.

गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रिश्वतखोरी के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. फिलहाल, इस कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि अब घूसखोरी करने वालों के लिए बच निकलना आसान नहीं होगा. लेकिन बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है. कि आखिर कब तक गरीब और जरूरतमंद लोग नौकरी के नाम पर ऐसे दलालों के जाल में फंसते रहेंगे?

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