नीतीश कुमार का हैप्पी रहना बीजेपी के लिए क्यों है जरूरी, पढ़ लीजिए Inside Story

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबर आने के बाद जदयू कार्यकर्ता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.उन्हें लगता है कि एनडीए ने वोट नीतीश कुमार के चेहरे पर मांगा था और तीन महीने के बाद ही नीतीश कुमार से राज्यसभा का नामांकन दाखिल करा दिया गया.

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नीतीश कुमार को हैप्पी रखना बीजेपी ने जरूरी है
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  • नीतीश कुमार का राज्यसभा नामांकन जदयू कार्यकर्ताओं में असंतोष और धोखा महसूस कराने वाला कदम माना जा रहा है
  • बीजेपी नीतीश कुमार को तुरंत हटाने के बजाय बिहार विधानपरिषद चुनाव तक इंतजार करेगी और रणनीति धीमी रखेगी
  • विधानपरिषद चुनाव में नीतीश के पुत्र निशांत कुमार के विधायक बनने पर उपमुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी आसान होगा
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नई दिल्ली:

बिहार में नीतीश कुमार का राज्यसभा में नामांकन करते ही राजनीति 360 डिग्री पर घूम गई है.जेडीयू के ज़मीनी कार्यकर्ता इस बात को पचा ही नहीं पा रहे हैं कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे.जदयू कार्यकर्ता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है.उन्हें लगता है कि एनडीए ने वोट नीतीश कुमार के चेहरे पर मांगा था और अब तीन महीने के बाद ही नीतीश कुमार से राज्यसभा का नामांकन दाखिल करा दिया गया. जेडीयू के कार्यकर्ता बार बार यही कहते रहे कि नीतीश कुमार के बारे में जो कुछ वो सुन या देख रहे हैं वो सब मीडिया में ही है और पार्टी सूत्रों से उन्हें कुछ नहीं बताया गया है.

बीजेपी को इन सभी चीजों की जानकारी है इसलिए बीजेपी की रणनीति है कि चीजों को अब उतनी तेजी से आगे नहीं बढाएगी ब्लकि चीजों को धीमा करेगी. पटना से जो खबर आ रही है कि उसके अनुसार नीतीश कुमार अभी तुरंत नहीं हटाए जाएंगे. इसमें एक दो महीने का वक्त बीजेपी लेगी.कहा जा रहा है कि बीजेपी तब तक रूकेगी जब तक बिहार में विधानपरिषद का चुनाव नहीं हो जाता है.उस चुनाव में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार उम्मीदवार होंगे.एक बार निशांत विधायक हो जाऐं तब उनका उपमुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी खुल जाएगा,और ये सब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहते हुए करना चाहते हैं.

दूसरी बात बीजेपी ने यह भी संकेत दिया है अगला मुख्यमंत्री चुनने में भी नीतीश कुमार की अहम भूमिका होगी.बीजेपी नीतीश कुमार के अति पिछड़ा वोट बैंक को खोना नहीं चाहेगी इसलिए अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इस पर पूरा सोच विचार जरूरी है.बीजेपी ने मध्यप्रदेश,राजस्थान,छत्तीसगढ़ और ओड़िसा में वैसे नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया जिनके नाम की कहीं चर्चा भी नहीं थी,यही बात बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बारे में भी कहा गया जब नीतिन नबीन को बनाया गया.

मगर बिहार में यह फ़ार्मूला काम नहीं करेगा क्योंकि यहां गठबंधन की सरकार है और सबको साथ लेकर चलना होगा खासकर नीतीश कुमार और जदयू.सबसे बड़ी बात है कि बीजेपी मुख्यमंत्री के चेहरे पर जातियों को कैसे बैलेंस करती है.यदि आप एक कुर्मी मुख्यमंत्री हटाते हैं तो किसको लाऐंगे यह यक्ष प्रश्न है बीजेपी के लिए.यही पर नीतीश कुमार का अनुभव बीजेपी को बहुत काम आ सकता है.यही वजह है कि नीतीश कुमार को बीजेपी अभी अच्छे मूड में रखना चाहेगी खास कर जब तक बिहार में सत्ता का हस्तांतरण पूरी तरह से मुकम्मल नहीं हो जाता है.

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