Bihar News: राजनीति में कुछ किस्से ऐसे होते हैं जो सत्ता की चकाचौंध से दूर, विशुद्ध भावनाओं और पारिवारिक संस्कारों की नींव पर टिके होते हैं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सियासी सफर का ऐसा ही एक बेहद भावुक और अनसुना पन्ना नीतीश आर्काइव (Nitish Archive) के जरिए सामने आया है. यह वाकया उस दिन का है, जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और कुर्सी पर बैठते ही सबसे पहला फोन अपनी जन्मभूमि बख्तियारपुर मिलाया था.
'मां जी... मुख्यमंत्री कक्ष से मुन्ना बोल रहा हूं'
गांधी मैदान में ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के बाद शाम करीब 4:30 बजे बिहार के नए मुखिया सीधे अपने मुख्यमंत्री कक्ष पहुंचे. नई और बड़ी जिम्मेदारी का भार कंधों पर आते ही उन्होंने सबसे पहले अपने पैतृक आवास पर फोन किया. जैसे ही उधर से रिसीवर उठा, सीएम की आवाज आई- 'मां जी, मुख्यमंत्री कक्ष से मुन्ना बोल ही, आशीर्वाद देहो... कुर्सी पर बैठे से जिम्मेवारी बढ़ गेलई ह.' उन्होंने अपनी मां से वादा किया कि फुर्सत मिलते ही वह सीधे उनका चरण स्पर्श करने गांव आएंगे.
ठेठ मगही में मां का वो 'कड़क' निर्देश
बेटे को सूबे के सबसे बड़े पद पर आसीन देख मां खुशी से आह्लादित थीं, लेकिन उनकी बातों में एक बड़ी जिम्मेदारी का अहसास भी छुपा था. रिसीवर कान से लगाते ही मां ने ठेठ मगही भाषा में अपने बेटे को राजधर्म का पहला पाठ पढ़ाते हुए कहा, 'काम कर, सदा आशीर्वाद हय. हम सब टीवी पर देखली हल. अब काम बढ़ गेलो ह, खूब बढ़िया काम कर. सारा आदमी के नजर तोरे पर हई.' यह सिर्फ एक मां का आशीर्वाद नहीं, बल्कि पूरे बिहार की जनता की उम्मीदों का आईना था, जो उन्होंने अपने बेटे के सामने रख दिया था.
बख्तियारपुर में उड़ रहा था गुलाल
उस ऐतिहासिक दिन बख्तियारपुर वाले घर का माहौल किसी बड़े त्योहार से कम नहीं था. सुबह से ही मां, भइया, भाभी, भतीजी और नाती सहित पूरा परिवार टीवी के सामने बैठा पल-पल का गवाह बन रहा था. जैसे ही टीवी पर शपथ ग्रहण पूरा हुआ, घर के बाहर प्रशंसकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा. लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगा रहे थे और मिठाइयां बांटकर जश्न मना रहे थे. उस दिन हर कोई इस बात को लेकर आश्वस्त था कि अब उनका 'मुन्ना' बिहार की तकदीर बदलने के लिए तैयार है.
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