नवादा के ककोलत झरने में बेकाबू हुए पर्यटक, पुलिस ने चटकाई लाठियां; आपस में उलझे लोग

नवादा के ककोलत झरने में भीड़ बढ़ने से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. किसी भी समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है. अव्यवस्थाओं की शिकायत मिलने पर अब एसडीओ ने विशेष बैठक बुलाई है.

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नवादा के ककोलत झरने में बेकाबू हुए पर्यटक

भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए इन दिनों बिहार के नवादा जिले के गोविंदपुर की पहाड़ी श्रृंखलाओं में स्थित ककोलत झरना (Kakolat Falls) में पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. 150 फीट की ऊंचाई से शीतल जल का झरना गिरता है. इसका लुत्फ उठाने के लिए बिहार और बिहार के बाहर के लोग आते रहे हैं. ठंडे और प्राकृतिक जलधारा के कारण ‘बिहार का कश्मीर' कहलाने वाला यह पर्यटन स्थल लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. हालांकि लगातार बढ़ती भीड़ अब गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है. हालात ऐसे हैं कि कुंड क्षेत्र में लोगों को खड़े होने तक की जगह नहीं मिल रही है. कुंड के अलावा चेंजिंग रूम और उसकी छत तक लोगों से भरी नजर आ रही है. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भी चटकानी पड़ी. हालांकि पुलिस प्रशासन ने इसे खारिज किया है. 

भीड़ बढ़ने से सुरक्षा व्यवस्था कमजोर

दरअसल, प्रतिदिन हजारों की संख्या में पर्यटक ककोलत पहुंच रहे हैं. आसपास के जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग यहां गर्मी से राहत पाने के लिए आ रहे हैं. बड़ी संख्या में निजी वाहन, बस और बाइक पहुंचने से पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था की स्थिति बन गई है. सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि सीमित क्षमता वाले कुंड में जरूरत से कहीं अधिक लोगों को एक साथ प्रवेश दिया जा रहा है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग बिना किसी नियंत्रण के टिकट जारी कर रहा है. उनका कहना है कि विभाग का पूरा ध्यान राजस्व बढ़ाने पर है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर बनी हुई है.

पर्यटकों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं हैं. इसके अलावा लाइफ जैकेट, प्राथमिक उपचार केंद्र, मेडिकल टीम और आपातकालीन सहायता जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं. 

अव्यवस्था की शिकायत पर SDO ने बुलाई बैठक

भीड़ बढ़ने से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गर्मी से राहत पाने के लिए लोग जोखिम उठाकर फिसलन भरे पत्थरों और गहरे पानी के बीच स्नान करने को मजबूर हैं. कुंड के आसपास कई बार धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बन जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का संतुलन बिगड़ जाए तो बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले भी प्रशासन द्वारा पर्यटकों की संख्या नियंत्रित करने की बात कही गई थी, लेकिन इसका असर जमीन पर दिखाई नहीं दिया.

लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध यह पर्यटन स्थल अव्यवस्था और हादसों का केंद्र बन सकता है. रजौली के एसडीओ स्वतंत्र कुमार सुमन ने स्थिति का संज्ञान लिया है. उन्होंने बताया कि क्षमता से अधिक लोगों के प्रवेश की शिकायत मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों के साथ विशेष बैठक बुलाई गई है. प्रशासन अब सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी में है.

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बताया जा रहा है कि बैठक में प्रतिदिन सीमित संख्या में पर्यटकों को प्रवेश देने, बैच सिस्टम लागू करने, समय स्लॉट तय करने और कुंड क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को अनिवार्य रूप से लागू करने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा होगी. इसके अलावा पार्किंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पर भी विचार किया जा रहा है.