माइग्रेशन हमेशा खराब ही नहीं होता... NDTV से बोले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

पीयूष गोयल ने आगे कहा कि महागठबंधन कह रहा है कि वो ढाई करोड़ नौकरियां देंगे. लेकिन क्या महागठबंधन ने बिहार का बजट नहीं देखा है. बिहार का बजट क्या इतना है कि वो एक साथ इतने लोगों को नौकरी दे सकें, ये सोचने वाली बात.

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पीयूष गोयल ने बिहार के विकास की योजना भी बताई
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  • पीयूष गोयल ने कहा कि बिहार के लोग विदेश जाकर रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं और जॉब क्रिएटर बन रहे हैं
  • उन्होंने बताया कि बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ने से युवा अब बिहार में रहकर ही रोजगार कर रहे हैं
  • एनडीए सरकार ने बिहार में कई इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित करने की योजना बनाई है जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
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पटना:

बिहार चुनाव को लेकर बढ़ती सियासी सरगर्मी के बीच NDTV पावरप्‍ले के मंच पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी अपनी बात रखी. इस दौरान उन्होंने बिहार से होने वाले माइग्रेशन (प्रवास) की भी बात की. इस बातचीत के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि शहर से बाहर प्रवास करना हमेशा बुरा नहीं होता. अगर बिहार का कोई व्यक्ति जापान जाता है तो क्या यह बुरा है? बिहार के लोग अब जॉब क्रिएटर बन रहे हैं. ऐसे कई लोग हैं जो बिहार से बाहर जाने के बाद आज उस मुकाम पर हैं जहां वह बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार दे सकें. 

उन्होंने कहा कि अगर बात बेरोजगारी की करें तो आपको परीपेक्ष में देखना पड़ेगा कि पहले इसकी दर क्या थी. आज बिहार में अवसर मिल रहे हैं इसलिए लोग बाहर नहीं जा रहे हैं. आज दूसरे राज्यों में लोगों को लेबर नहीं मिल रहा है. क्योंकि आज यहां का युवा बिहार में रहकर ही अपना रोजगार कर रहा है, यहां रोजगार के साधन बन रहे हैं. आज विदेश में लेबर नहीं मिल रही है. जब मैंने खुद फैक्ट्री शुरू की थी उस समय मुझे बिहार का लेबर मिला था लेकिन आज ऐसा नहीं है. 

पीयूष गोयल ने आगे कहा कि महागठबंधन कह रहा है कि वो ढाई करोड़ नौकरियां देंगे. लेकिन क्या महागठबंधन ने बिहार का बजट नहीं देखा है. बिहार का बजट क्या इतना है कि वो एक साथ इतने लोगों को नौकरी दे सकें, ये सोचने वाली बात. एनडीए ने वो वादा किया है जिसे हम पूरा कर पाएंगे. हम यहां कई इंडस्ट्री लेकर आ रही हैं. हमने प्लान बनाया है कि यहां कैसे इंडस्ट्रियल पार्क लगे, आगे चलकर पांच और इंडस्ट्रियल पार्क लगाने की तैयारी है. 

पीयूष गोयल ने इस बातचीत के दौरान बिहार में हो रहे आपराधिक मामलों पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि एक समय था जब बिहार में अपराध होने के बाद भी पुलिस में जाकर मामला दर्ज कराने की हिम्मत नहीं करता था. उस जमाने में अगर कोई नई गाड़ी खरीदता था तो फिरौती देनी पड़ती थी. पुलिस स्टेशन जाओ शिकायत करने तो वहां से मुख्यमंत्री के घर भेजा जाता था. जब उस समय पुलिस स्टेशन में शिकायत ही नहीं होती थी तो फिर आप उस समय के आंकड़े  कहां से लाएं. आज हालात बदल चुके हैं. आज बिहार में कानून-व्यवस्था ऐसी ही कि कोई घर से बाहर निकलते समय डरता नहीं है. पुलिस स्टेशन में जाने से किसी को डर नहीं लगता. 

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