अब विदेशी पैसों का इस्तेमाल कर सकेगा गयाजी का महाबोधि महाविहार, गृह मंत्रालय ने दिया निर्देश

बोधगया स्थित विश्व धरोहर महाबोधि महाविहार के लिए दान में मिलने वाली विदेशी मुद्रा को लेकर चला आ रहा लंबा गतिरोध अब समाप्त हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बोधगया शाखा ने विदेशी मुद्रा स्वीकार करना शुरू कर दिया है. रंजन सिन्हा की रिपोर्ट

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  • महाबोधि महाविहार के लिए विदेशी मुद्रा स्वीकार करने में लंबा गतिरोध गृह मंत्रालय के आदेश से समाप्त हुआ है
  • SBI की बोधगया शाखा ने विदेशी मुद्रा स्वीकार करना शुरू कर दिया है जिससे वित्तीय अड़चनें दूर होंगी
  • 33 देशों की विदेशी मुद्रा जमा कराई, जिसमें म्यांमार, थाईलैंड, वियतनामी बौद्ध श्रद्धालुओं का प्रमुख योगदान रहा
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बोधगया स्थित विश्व धरोहर महाबोधि महाविहार के लिए दान में मिलने वाली विदेशी मुद्रा को लेकर चला आ रहा लंबा गतिरोध अब समाप्त हो गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बोधगया शाखा ने विदेशी मुद्रा स्वीकार करना शुरू कर दिया है. इससे महाबोधि मंदिर के प्रबंधन और रखरखाव से जुड़ी वित्तीय अड़चनें दूर होने की उम्मीद है.

गया जिले के बोधगया में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाबोधि महाविहार को दान में मिलने वाली विदेशी मुद्रा के उपयोग को लेकर लंबे समय से बनी असमंजस की स्थिति अब खत्म हो गई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FCRA) शाखा के आदेश के बाद, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की बोधगया शाखा ने विदेशी देशों की मुद्रा स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

इसके तहत बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) ने हाल ही में एसबीआई की बोधगया शाखा में 33 देशों की विदेशी मुद्रा जमा कराई है. यह राशि महाबोधि महाविहार और बीटीएमसी कार्यालय में रखी दान पेटियों से प्राप्त हुई है. दान में सबसे अधिक योगदान म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम से आए बौद्ध श्रद्धालुओं के साथ-साथ यूरोपीय देशों के पर्यटकों का रहा है.

दान पेटियों से प्राप्त प्रमुख विदेशी मुद्राओं में 5 करोड़ 31 लाख 52 हजार 300 म्यांमार क्यात (लगभग 21.26 लाख रुपये), 7 लाख 6 हजार 940 थाई बात (करीब 17.67 लाख रुपये), 10 हजार 376 अमेरिकी डॉलर (लगभग 9.33 लाख रुपये) और 28 करोड़ 21 लाख वियतनामी डोंग (करीब 8.46 लाख रुपये) शामिल हैं.

जिलाधिकारी सह बीटीएमसी अध्यक्ष शशांक शुभंकर ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने पहले ही एसबीआई को नियमों के अनुसार ऐसे दान स्वीकार करने के निर्देश दिए थे, लेकिन शाखा स्तर पर प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही थी. इस समस्या को देखते हुए बीटीएमसी की सचिव महाश्वेता महारथी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त निदेशक को पत्र लिखकर विदेशी मुद्रा को अधिकृत माध्यमों से भारतीय मुद्रा में बदलने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे थे. इसके बाद गृह मंत्रालय के आदेश से यह अड़चन दूर हो सकी.

डीएम ने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में बीटीएमसी को कुल 2 करोड़ 2 लाख 3 हजार 494 रुपये का दान प्राप्त हुआ है. इसमें 1 करोड़ 29 लाख 41 हजार 100 रुपये भारतीय मुद्रा और 72 लाख 62 हजार 394 रुपये विदेशी मुद्रा शामिल हैं. दिसंबर के पहले पखवाड़े में दान पेटियां खोली गईं, जिनकी गिनती 15 से 23 दिसंबर तक नौ दिनों में पूरी की गई.

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दान के रूप में म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम के अलावा श्रीलंका, कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कंबोडिया, नेपाल, ब्राजील, जापान, बांग्लादेश, भूटान, यूएई, इंग्लैंड, चीन, ताइवान, कतर, ओमान, कुवैत, बहरीन, इराक और तुर्की सहित कई देशों से आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने विदेशी मुद्रा अर्पित की है. अब विदेशी मुद्रा को वैधानिक रूप से भारतीय मुद्रा में परिवर्तित कर महाबोधि महाविहार के संरक्षण, प्रबंधन और सुविधाओं के विकास में उपयोग किया जा सकेगा, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं मिलेंगी.

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