मधेपुरा के किसानों की पुकार- भुखमरी की हालत हो जाएगी, मदद करो सरकार

बिहार के मधेपुरा से किसानों की परेशानी की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है. मधेपुरा सदर प्रखंड के खौपेती गांव में जंगली जानवर घोड़परास किसानों की फसलों पर कहर बनकर टूट रहे हैं. अरमण कुमार की रिपोर्ट

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  • मधेपुरा सदर प्रखंड के खौपेती गांव समेत कई गांवों में जंगली घोड़परास किसानों की रबी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं
  • जंगली जानवर दिन-रात खेतों में घुसकर मक्का, गेहूं और मटर जैसी फसलों को पूरी तरह तबाह कर चुके हैं
  • किसान रातभर खेतों की रखवाली कर रहे हैं लेकिन जानवरों को भगाने में वे पूरी तरह असफल हो रहे हैं
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बिहार के मधेपुरा से किसानों की परेशानी की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है. मधेपुरा सदर प्रखंड के खौपेती गांव में जंगली जानवर घोड़परास किसानों की फसलों पर कहर बनकर टूट रहे हैं. दिन-रात खेतों में घुसकर ये जानवर मक्का, गेहूं और मटर जैसी रबी फसलों को पूरी तरह तबाह कर रहे.

मधेपुरा सदर प्रखंड क्षेत्र के खौपेती, गंगापुर, भलनी,भैलाही सहित कई गांव में इन दिनों किसानों की नींद उड़ चुकी है. दर्जनों की संख्या में झुंड बनाकर घोड़परास खेतों में घुस रहे हैं और हरे-भरे खेतों को चंद घंटों में बर्बाद कर दे रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि कई किसानों की पूरी फसल नष्ट हो चुकी है.

किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद जानवरों को भगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं. लगातार हो रहे नुकसान से किसान न सिर्फ आर्थिक बल्कि मानसिक रूप से भी टूट चुके हैं.

 “सब कुछ जानवर बर्बाद कर दे रहा है. मटर, गेहूं, मक्का सब चौपट हो गया है. दिन-रात खेत की रखवाली कर रहे हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं है. अगर जल्द मदद नहीं मिली तो हम लोग भुखमरी की हालत में पहुंच जाएंगे.”

किसानों का कहना है कि वन विभाग और कृषि विभाग को मिलकर ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि जंगली जानवरों को खेतों और आबादी से दूर रखा जा सके. “इस विषय में आवश्यक कदम उठाने के लिए मुखिया सक्षम हैं। स्थानीय स्तर पर मुखिया इस पर निर्णय ले सकते हैं.” 

हालांकि किसानों का कहना है कि केवल निर्देश देने से समस्या का समाधान नहीं होगा. उनका आरोप है कि जब तक प्रशासन की ओर से ठोस योजना, सर्वे और त्वरित कार्रवाई नहीं होगी, तब तक घोड़परास का आतंक यूं ही जारी रहेगा.

पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित इलाकों का सर्वे कर नुकसान का आकलन किया जाए, मुआवजा दिया जाए और घोड़परास को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों की फसल और आजीविका सुरक्षित रह सके.