ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब ग्रामीण इलाकों के पेट्रोल पंपों पर दिखने लगा है. पिछले कुछ घंटों से सोशल मीडिया और ग्रामीण चर्चाओं में पेट्रोल-डीजल की संभावित किल्लत और कीमतों में भारी बढ़ोतरी की अफवाह तेजी से फैल रही है. आलम यह है कि गुरुवार को जिले के कई पेट्रोल पंपों पर अफरातफरी की स्थिति देखी गई और तेल की बिक्री में 2 से 3 गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई.
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, पंपों पर 'पैनिक बाइंग'
सोशल मीडिया पर अमौर प्रखंड के फ़लसा पेट्रोल पंप का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वाहन चालकों और किसानों की भारी भीड़ देखी जा सकती है. लोग न केवल अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल करवा रहे हैं, बल्कि गैलन और ड्रमों में भी तेल भरकर ले जा रहे हैं.
क्या है अफवाह की जड़?
ग्रामीण इलाकों में यह चर्चा जोरों पर है कि युद्ध के कारण भारत में कच्चे तेल की सप्लाई रुक सकती है. देश में केवल तीन सप्ताह का ही स्टॉक बचा है. आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि होगी.
हकीकत क्या है? जानकारों और पंप मालिकों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में स्थिति सामान्य है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे फुटकर दुकानदार (जो ड्रम में तेल बेचते हैं) ज्यादा मुनाफे के चक्कर में जमाखोरी कर रहे हैं, जिससे कृत्रिम किल्लत पैदा होने का डर है.
पंप मालिकों ने कहा- "अफवाहों पर ध्यान न दें"
स्थानीय पेट्रोल पंप संचालकों ने स्पष्ट किया है कि तेल की कोई कमी नहीं है. ग्रामीणों की आशंका निराधार है, सप्लाई पूरी तरह सामान्य है."
जमाखोरी से बचें, प्रशासन की नजर
ग्रामीण क्षेत्रों में जिस तरह से ड्रमों में तेल भरकर ले जाया जा रहा है, वह न केवल अफवाह को बढ़ावा देता है बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है. पेट्रोल पंप संचालकों ने आम जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और सामान्य रूप से ही ईंधन की खरीदारी करें.














