- बिहार की जनता नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने और दिल्ली जाने की खबरों से हैरान और असमंजस में है
- आम जनता का मानना है कि नीतीश कुमार के जाने से बिहार का विकास रुक सकता है और यह धोखा होगा
- पिछड़ी जातियां और महिलाएं नीतीश कुमार को मसीहा मानती हैं और उनकी योजनाओं को लेकर चिंतित हैं
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा का पर्चा भरने और इसके साथ ही उनके दिल्ली जाने की खबरों के बीच सबसे ज्यादा हैरान है, यहां की जनता. विधानमंडल जहां नामांकन हो रहे थे, तमाम पुलिस बंदोबस्त के लोगों के आने का सिलसिला जारी रहा. जितने भी लोग हमें वहां मिले, वो सभी इस बात को मानने से इनकार करते रहे कि नीतीश कुमार दिल्ली जा रहे हैं, राज्यसभा का सदस्य बन कर. सभी ने यही कहा- 'हमें मीडिया से ही मालूम हुआ है.'
तो बिहार का विकास रुक जाएगा?
किसी ने भी सोचा नहीं होगा कि 6 महीने से पहले ही नीतीश कुमार सत्ता छोड़, दिल्ली की राजनीति में आ जाएंगे. पटना में कुछ लोग रामनाथ ठाकुर के नामांकन के लिए उनके समर्थन में भी आए थे. समस्तीपुर के रामशरण जी ने कहा कि नीतीश कुमार को कभी अपना पद नहीं छोड़ना चाहिए. किसी भी हालत में नहीं. उन्हीं के साथ आए एक सज्जन का कहना था- 'नीतीश कुमार विकास पुरुष हैं, यदि वे गए तो विकास रुक जाएगा.
यह जनता के साथ धोखा है!
लेकिन सबसे तीखी प्रतिक्रिया बेगूसराय से आए रामबालक महतो जी की थी, उनका कहना था कि यह जनता के साथ धोखा है. हमने नीतीश कुमार के चेहरे को देखकर वोट किया था. यदि नीतीश कुमार आगे मुख्यमंत्री नहीं रहते हैं और कोई और मुख्यमंत्री बनता है, तो दुबारा चुनाव होना चाहिए, जिसमें मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए और फिर वोट मांगे जाए. कुछ ऐसी ही भावना विधानमंडल पहुंचे, लगभग सभी लोगों की थी.
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दरअसल, बिहार की पिछड़ी जातियों खासकर अत्यंत पिछड़ी जाति नीतीश कुमार को अपना मसीहा मानती रही है. ये लोग परंपरागत रूप से नीतीश कुमार को वोट करते आए हैं, जिसमें महिलाओं का वोट जुड़ा, जिसको ध्यान में रखकर नीतीश कुमार ने योजनाएं बनाई.
बिहार में शराबबंदी के दिन अब गिने-चुने...?
हमने कुछ महिलाओं से भी बात की, उन्हें तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि वो क्या कहें? एक महिला ने कहा कि अब लगता है कि बिहार में शराबबंदी खत्म हो जाएगी. बिहार में शराबबंदी पर चर्चा केवल महिलाएं ही नहीं बहुत सारे पुरुष भी कर रहे हैं. अब अखिकतर लोग यह मानने लगे हैं कि बिहार में शराबबंदी के दिन अब गिने-चुने हैं. लेकिन बिहार की महिलाओं की एक और बड़ी चिंता है कि नीतीश कुमार ने जो योजनाएं उनके लिए शुरू की हैं, उनका क्या होगा? सबसे बड़ी चिंता तो उस किस्त की है, जिसका वायदा महिलाओं से किया गया है.
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कुल मिलाकर कर नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे, इसको स्वीकार करने में बिहार की जनता को वक्त लगेगा. क्योंकि उन्हें नीतीश कुमार की आदत सी पड़ गई थी. यही वजह है कि वो नीतीश कुमार को लगातार वोट करते आए. चाहे नीतीश कुमार किसी भी पाले में रहें. बिहार की जनता को कोई फर्क नहीं पड़ा, जब सुशासन बाबू पलटू बाबू बन गए, लेकिन फिर भी उन्होंने नीतीश कुमार को जिताया.
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