- बिहार के शेखपुरा के मदारी गांव में दो साल पहले स्थापित बायोगैस प्लांट से 17 घरों में गैस की आपूर्ति हो रही है
- बायोगैस प्लांट से धुआं मुक्त खाना पकाने की सुविधा मिली है जिससे लकड़ी और उपले के प्रयोग में कमी आई है
- इस प्लांट के कारण ग्रामीणों का खर्च कम हुआ है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिली है
देश के कई राज्यों के साथ बिहार में भी गैस की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं. अफवाह के बाद कालाबाजारी से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि इस संकट के बीच शेखपुरा सदर प्रखंड के मदारी गांव के लोग गैस सिलेंडर की समस्या से अछूते हैं. यहां दो साल पहले स्थापित बायोगैस प्लांट इन दिनों ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
गांव में लगे इस प्लांट से पाइपलाइन के जरिए 17 घरों में गैस की आपूर्ति की जा रही है, जिससे लोगों की रसोई आसानी से चल रही है. ग्रामीण बताते हैं कि दो साल पहले लगे इस गैस प्लांट से दोनों समय खाना बन रहा है.
लोगों ने कहा कि एक तरफ जहां गांव धुआं मुक्त हो रहा है, वहीं रसोई गैस लाने की झंझट भी खत्म है. पहले लकड़ी और उपले से खाना बनाते थे, लेकिन अब बायोगैस से खाना बना रहे हैं. बायोगैस प्लांट के कारण जहां लोगों का खर्च कम हुआ है, वहीं पर्यावरण के लिहाज से भी यह एक बेहतर और स्वच्छ विकल्प है.
ग्रामीणों ने बताया कि युद्ध के कारण गैस की किल्लत की खबरें मिल रही हैं, लेकिन गांव में इसका कोई असर नहीं है. यहां दो वक्त, सुबह 6 से 9 बजे और शाम में 4 से 7 बजे तक गैस की आपूर्ति की जाती है. गैस शुद्ध और तेज रहे इसके लिए बैलून और किट लगाया गया है. जिसमें गैस स्टोर होता है फिर आपूर्ति की जाती है.
गोबर गैस प्लांट के ऑपरेटर ने बताया कि यहां से दो वक्त गैस की आपूर्ति की जाती है. जिससे घरों में गैस सिलेंडर की समस्या नहीं है और ग्रामीण पाइप लाइन से आए बायोगैस से खाना बना रहे हैं. बायोगैस पर बनाया गया खाना ना सिर्फ हेल्दी और स्वादिष्ट होता है, बल्कि लोगों को गैस की महंगाई से काफी राहत भी दे रहा है.
गौरतलब है कि सीएम नीतीश कुमार 2023 में समाधान यात्रा के दौरान शेखपुरा के सदर प्रखंड के महसार पंचायत आए थे. इस दौरान गोवर्धन योजना के तहत गोबर गैस प्लांट की सौगात दी थी. पहले यहां से 15 घरों में आपूर्ति की जाती थी, लेकिन अब 35 घरों तक इसकी नियमित आपूर्ति हो रही है.
(शेखपुरा से रंजन कुमार की रिपोर्ट...)














