समृद्धि यात्रा में 'बहार' है, हरे चने की लूट! CM का भाषण चलता रहा, जनता खेत साफ करती रही

गयाजी में कार्यक्रम स्थल के पास स्थित खेतों में बड़ी संख्या में लोग खुलेआम हरे चने की फसल उखाड़ते नजर आए.

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  • बिहार के गया जिले के मायापुर गांव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान चने की फसल उखाड़ी गई.
  • कार्यक्रम स्थल के पास आधुनिक खेती के मॉडल वाले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस परिसर में हरी चने की फसल को नुकसान पहुंचा.
  • बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान चने के पौधे उखाड़कर ले जा रहे थे।.
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बिहार के गयाजी जिले में CM नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान एक हैरान कर देने वाला दृश्य सामने आया. मंच पर जहां विकास और आधुनिक खेती की बातें हो रही थीं, वहीं ठीक नीचे खेत में लोग चना उखाड़ते दिखाई दिए.

गया जिले के टनकुप्पा प्रखंड के मायापुर गांव में आयोजित इस कार्यक्रम में CM नीतीश कुमार राज्य में विकास, कृषि सुधार और आधुनिक खेती की उपलब्धियों का बखान कर रहे थे. लेकिन इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के पास स्थित खेतों में बड़ी संख्या में लोग खुलेआम हरे चने की फसल उखाड़ते नजर आए. यह कार्यक्रम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस परिसर में आयोजित था, जिसे आधुनिक और टिकाऊ खेती के मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है. यहां विशेष रूप से मिलेट्स और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है. ऐसे महत्वपूर्ण परिसर में चने की फसल को नुकसान पहुंचाया जाना कई प्रश्न खड़े करता है.

दरअसल, आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पहुंचे थे. उसी भीड़ के बीच कुछ लोगों ने खेत में लगी हरी चने की फसल उखाड़ना शुरू कर दिया. देखते ही देखते यह एक तरह का ‘चना तोड़ अभियान' बन गया. वहां से गुजरने वाला लगभग हर व्यक्ति चने के पौधे उखाड़कर लेता दिखा. कई लोग तो हाथों में चने के पौधे पकड़े ही सभा स्थल की ओर बढ़ते नजर आए.

यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जिस परिसर को आधुनिक कृषि मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहीं सरकारी फसल को इस तरह क्षति पहुंचना पूरे सिस्टम की लापरवाही उजागर करता है. एक ओर मंच से कृषि विकास, किसानों की आय बढ़ाने और नई तकनीक के उपयोग की बात हो रही थी, दूसरी ओर जमीन पर हकीकत बिल्कुल अलग दिखाई दे रही थी.

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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में सरकारी संपत्ति और फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ता रहेगा. फिलहाल, यह पूरा मामला प्रशासनिक चूक और भीड़ प्रबंधन की बड़ी विफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

रंजन सिन्हा की रिपोर्ट

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