उद्घाटन के 3 साल बाद ही बोधगया-ढुंगेश्वरी मार्ग पर बना पुल हुआ जर्जर, 16 में से 12 पिलर जर्जर

बुद्ध सर्किट को जोड़ने वाले सतपुर-सिलौंजा पुल के 16 में से 12 पिलर की हालत काफी जर्जर है. पटना आईआईटी की जांच रिपोर्ट में गया जिले के तीन पुलों की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है.

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उद्घाटन के 3 साल बाद ही बोधगया-ढुंगेश्वरी मार्ग पर बना पुल हुआ जर्जर

बिहार में पुलों को लेकर आई पटना आईआईटी (IIT Patna) की रिपोर्ट ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. बोधगया-ढुंगेश्वरी मार्ग पर गया जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बना पुल उद्घाटन के मात्र 3 साल बाद ही जर्जर हो गया है. बुद्ध सर्किट को जोड़ने वाले बसतपुर-सिलौंजा पुल के 16 में से 12 पिलर जांच में जर्जर पाए गए. 3 साल पहले उद्घाटन होने वाले इस पुल को लेकर रिपोर्ट सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में डर और चिंता का माहौल है. अगर समय रहते बसतपुर-सिलौंजा पुल की मरम्मत नहीं की गई तो हादसे का खतरा बढ़ सकता है. 

2023 में पुल का हुआ था उद्घाटन

पटना आईआईटी की जांच रिपोर्ट में गया जिले के तीन पुल जर्जर हाल में पहुंच चुके हैं. इनमें बसतपुर-सिलौंजा पुल, चटकी-दरियापुर गोरा रोड पुल और राज बिगहा से बेलदार बिगहा जाने वाले पुल की स्थिति चिंताजनक है. बता दें कि बुद्ध सर्किट को जोड़ने वाले बसतपुर-सिलौंजा पुल का 2023 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्घाटन किया था. इस पुल के बन जाने से लाखों लोगों को फायदा पहुंचा. इससे बोधगया जाने के लिए काफी समय की बचत होती है. 

लोगों का कहना है कि करोड़ों खर्च होने के बावजूद पुल इतनी जल्दी जर्जर कैसे हो गया. ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और पुल की मरम्मत की मांग की है.

बसतपुर-सिलौंजा पुल की जर्जर हालत को लेकर हम पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनुज कुमार यादव ने गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि पुल की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और यह कब गिर जाएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है. पुल के नीचे रोजाना 200 से 300 बच्चे खेलते हैं, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ गया है. उन्होंने बताया कि पुल के 6 से 7 पिलरों में लगी छड़ें बाहर निकल चुकी हैं. कई जगहों पर सीमेंट पूरी तरह टूट चुका है और पांच से छह फीट तक लोहे की रॉड साफ दिखाई दे रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि बाहर निकली छड़ों को बच्चे काटकर बेच भी रहे हैं.

पुल की हालत देखकर आसपास के लोगों में चिंता का माहौल

उन्होंने कहा कि जब 32 चक्का ट्रक और बड़े वाहन पुल से गुजरते हैं तो पूरा पुल कंपन करने लगता है. उस समय ऐसा लगता है कि पुल कभी भी गिर सकता है. यह पुल इलाके के लोगों के लिए लाइफ लाइन है और करीब एक हजार गांव इससे जुड़े हुए हैं. अगर पुल गिरता है तो हजारों लोगों का संपर्क टूट जाएगा. अनुज कुमार ने कहा कि बरसात के समय मोहाने नदी में हल्की बारिश में भी बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है. पुल बनने से पहले बरसात में लोगों का बोधगया और गया से संपर्क कट जाता था. अब पुल की हालत देखकर ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है और लोग सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. 

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बसतपुर गांव निवासी जट्टू मांझी ने बसतपुर-सिलौंजा पुल की खराब स्थिति को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने बताया कि पुल के छह पायों से लोहे की छड़ बाहर दिखाई दे रही है. पुल से जब बड़ा वाहन, ट्रैक्टर या टेम्पो गुजरता है तो पूरा पुल दलदलाने लगता है. उन्होंने कहा कि पैदल आने-जाने वाले लोग भी पुल पर कंपन महसूस करते हैं. पुल पर चलते समय हमेशा डर बना रहता है कि कहीं यह अचानक गिर न जाए. जट्टू मांझी ने कहा कि पुल की स्थिति बेहद खतरनाक हो चुकी है और इस पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि या तो क्षतिग्रस्त पिलरों की मरम्मत कराई जाए या फिर नया पुल बनाया जाए. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है और कई लोगों की जान जा सकती है.

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