- बिहार में महिला आरक्षण बिल को लेकर बीजेपी और विपक्ष का विवाद और जुबानी जंग सड़क प्रदर्शन में बदलने वाला है.
- सोमवार को पटना के बापू सभागार से कारगिल चौक तक लगभग पचास हजार महिला कार्यकर्ताओं का आक्रोश मार्च निकलेगा.
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस विरोध-प्रदर्शन के लिए महिला नेताओं के साथ बैठक कर चर्चा की है.
बिहार की सियासत में 'महिला आरक्षण बिल' को लेकर संग्राम छिड़ गया है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग अब सड़क पर उतरने वाली है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष द्वारा कथित तौर पर पैदा की गई बाधाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कल, पटना की सड़कें बीजेपी कार्यकर्ताओं, विशेषकर महिला शक्ति के नारों से गूंजेंगी.
बापू सभागार से कारगिल चौक तक 'शक्ति प्रदर्शन'
कल सुबह 9:30 बजे पटना के बापू सभागार से एक विशाल 'आक्रोश मार्च' की शुरुआत होगी, जो कारगिल चौक तक जाएगी. इस मार्च में पूरे बिहार से लगभग 50 हजार महिला कार्यकर्ताओं के जुटने का अनुमान है. बीजेपी का उद्देश्य इस प्रदर्शन के जरिए आम जनता को यह बताना है कि कैसे कांग्रेस और राजद जैसे विपक्षी दलों की 'साजिश' के कारण महिलाओं को उनका हक मिलने में देरी हो रही है.
आक्रोश मार्च के लिए महिला नेताओं के साथ बैठक करते सीएम सम्राट चौधरी.
CM सम्राट का तीखा हमला: "परिवारवाद की भेंट चढ़ा आरक्षण"
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने नारी शक्ति के साथ विश्वासघात किया है. मुख्यमंत्री ने कहा, विपक्ष के नेता बिल न पास होने पर खुशियाँ मना रहे थे. लालू प्रसाद यादव का इतिहास बिल फाड़ने का रहा है. विपक्ष चाहता है कि उनके घर की बेटियां और पत्नियां तो सांसद बनें, लेकिन देश की आम महिलाओं को यह अवसर न मिले.
सीएम ने आगे कहा कि अगर यह बिल लागू होता, तो देश को 272 महिला सांसद मिलतीं और बिहार विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 29 से बढ़कर 129 हो जाती. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि एनडीए सरकार देश की चिंता करती है, जबकि विपक्ष केवल अपने परिवार और बाहरी हितों की चिंता में लगा है.
तेजस्वी का पलटवार: आरक्षण के अंदर आरक्षण की मांग
वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सरकार पर ही सवाल दाग दिए. तेजस्वी ने कहा कि हमें आरक्षण से कोई विरोध नहीं है, बल्कि हम तो महिलाओं के लिए 50% भागीदारी चाहते हैं. हालांकि, उन्होंने मांग की कि इस आरक्षण के भीतर ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए अलग कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
तेजस्वी ने सम्राट चौधरी पर तंज कसते हुए कहा, "मुख्यमंत्री को बिल की समझ ही नहीं है. अगर बिल 3 साल पहले पास हो गया था, तो इसे लागू क्यों नहीं किया गया? सरकार परिसीमन के नाम पर केवल विपक्ष को कमजोर करने की साजिश रच रही है." उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब बिहार सरकार को चलाने के लिए दिल्ली (PMO) से अधिकारी भेजे जा रहे हैं.
महिला नेताओं के बीच वार-पलटवार
बीजेपी और जेडीयू की महिला नेताओं ने भी विपक्ष को आड़े हाथों लिया है. पूर्व मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि विपक्ष की मानसिकता बेनकाब हो गई है. ये लोग महिला विरोधी हैं और केवल अपने घर की महिलाओं को सत्ता में देखना चाहते हैं.
बीजेपी विधायक संगीता कुमारी ने प्रियंका गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि बिल पास न होने पर खुशी मनाना शर्मनाक है. कल का मार्च इस 'साजिश' का करारा जवाब होगा.
सियासी मायने: क्या है बीजेपी की रणनीति?
बीजेपी इस आक्रोश मार्च के जरिए बिहार की आधी आबादी तक अपनी पहुंच मजबूत करना चाहती है. पार्टी का मानना है कि विपक्ष द्वारा बिल को लटकाने या विरोध करने की खबरों को जनता के बीच ले जाकर वे आगामी चुनावों में बड़ा बढ़त बना सकते हैं. कल का यह प्रदर्शन न केवल विरोध का स्वर होगा, बल्कि बीजेपी के लिए एक बड़ा चुनावी शक्ति प्रदर्शन भी साबित होने वाला है.
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