राबड़ी को लेकर बहस, हाथापाई की नौबत... बिहार विधानसभा में सदस्यों के व्यवहार से सदन की गरिमा पर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम का असर सदन की कार्यवाही पर भी पड़ा. जरूरी विधायी कामकाज प्रभावित हुआ और जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी. विपक्ष के वॉकआउट के बाद सत्ता पक्ष ने कार्यवाही आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन हंगामे का साया पूरे दिन बना रहा.

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बिहार विधान परिषद में हंगामे के दौरान की तस्वीर.
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  • बिहार विधानसभा और विधान परिषद में राबड़ी देवी से जुड़े मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई.
  • विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में जवाब देने से बच रही है और सदन को गुमराह कर रही है.
  • विधान परिषद में मंत्री अशोक चौधरी और राजद नेता सुनील कुमार सिंह के बीच बहस हाथापाई तक पहुंच गई.
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पटना:

बिहार विधानसभा और विधान परिषद में मंगलवार को राबड़ी देवी से जुड़े मुद्दे पर सियासी पारा चरम पर रहा. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, हंगामा और वॉकआउट ने पूरे दिन की कार्यवाही को प्रभावित किया. हालात इतने बिगड़ गए कि एक मौके पर मंत्री अशोक चौधरी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता सुनील कुमार सिंह के बीच हाथापाई जैसी स्थिति बन गई. यह घटनाक्रम सदन की गरिमा पर सवाल खड़े किए. दरअसल सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने राबड़ी देवी से जुड़े मुद्दे को जोर-शोर से उठाया. विपक्ष का आरोप था कि सरकार इस मामले में जवाब देने से बच रही है और सदन को गुमराह किया जा रहा है. 

इसी को लेकर पहले विधानसभा और फिर विधान परिषद में जोरदार हंगामा शुरू हो गया. नारेबाजी, वेल में आना और आसन के सामने विरोध प्रदर्शन आम दृश्य बन गया. विपक्षी दलों का कहना था कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान नहीं देती, तब तक सदन चलने नहीं दिया जाएगा.

हंगामे के बीच विपक्ष ने एकजुट होकर दोनों सदनों से वॉकआउट कर दिया. विपक्षी नेताओं का आरोप था कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाए जा रहे सवालों को दबाने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना था कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जनता से जुड़ा मामला है, जिस पर सरकार को जवाब देना चाहिए

अशोक चौधरी और सुनील कुमार सिंह के बीच तीखी बहस

इसी दौरान विधान परिषद में माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया. बहस के दौरान मंत्री अशोक चौधरी और राजद नेता सुनील कुमार सिंह के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. दोनों नेताओं के बीच शब्दों का स्तर लगातार गिरता गया और बात लगभग हाथापाई तक पहुंच गई. सदन में मौजूद अन्य सदस्यों और मार्शलों को बीच-बचाव करना पड़ा, तब जाकर स्थिति पर काबू पाया जा सका. इस घटना ने सदन की कार्यवाही को कुछ देर के लिए पूरी तरह ठप कर दिया

सत्ता पक्षः विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा

सत्ता पक्ष का कहना था कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है. सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि नियमों के तहत जो भी जवाब दिया जाना था, वह दिया जा चुका है, लेकिन विपक्ष राजनीतिक फायदा उठाने के लिए हंगामा कर रहा है. सत्ता पक्ष के नेताओं ने इसे विपक्ष की हताशा बताया और कहा कि जनता से जुड़े असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है.


विपक्ष का आरोप- सरकार सच सामने आने से डर रही

वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार सच सामने आने से डर रही है. विपक्षी नेताओं का कहना था कि राबड़ी देवी से जुड़े मामले में सरकार का रुख स्पष्ट नहीं है और इसी कारण सवालों से बचा जा रहा है. उनका यह भी कहना था कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, तो वह खुलकर सदन में जवाब दे.

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जानकर कह रहे- अभी और गरमाएगा बिहार सदन का महौल

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में आने वाले समय में राजनीतिक माहौल और गर्म होने वाला है. विधानसभा के अंदर जिस तरह का टकराव देखने को मिला, वह इस बात का संकेत है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भरोसे की खाई और गहरी होती जा रही है. सदन में संवाद की जगह टकराव बढ़ना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा.

इस पूरे घटनाक्रम का असर सदन की कार्यवाही पर भी पड़ा. जरूरी विधायी कामकाज प्रभावित हुआ और जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी. विपक्ष के वॉकआउट के बाद सत्ता पक्ष ने कार्यवाही आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन हंगामे का साया पूरे दिन बना रहा.

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कुल मिलाकर, राबड़ी देवी से जुड़े मुद्दे ने आज बिहार की राजनीति को पूरी तरह गर्मा दिया. हंगामा, वॉकआउट और हाथापाई जैसी स्थिति ने यह साफ कर दिया कि राजनीतिक मतभेद अब व्यक्तिगत टकराव में बदलते जा रहे हैं. सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में सदन के भीतर संवाद और शांति लौट पाएगी, या फिर ऐसे ही हंगामे बिहार की राजनीति की पहचान बनते चले जाएंगे.
 

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