ना मंत्रियों की भीड़, ना दिग्गजों का जमावड़ा, तेजस्वी भी नहीं आए... टेकऑफ से पहले 'क्रैश' हो गए तेज प्रताप?

Bihar News: तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज आयोजन के दिन तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आई. जिन बड़े नेताओं की मौजूदगी की उम्मीद थी, वे कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए. राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, मंत्री अशोक चौधरी और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को छोड़ दें, तो ज्यादातर बड़े चेहरे इस भोज से दूर रहे.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज में कौन-कौन पहुंचा.
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • बिहार में मकर संक्रांति पर तेजप्रताप यादव ने सरकारी आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया था
  • तेजप्रताप यादव ने एनडीए के कई बड़े नेताओं को भोज में शामिल होने का व्यक्तिगत रूप से न्योता दिया था
  • भोज के दिन अपेक्षित एनडीए के कई प्रमुख नेता और मंत्री कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
पटना:

मकर संक्रांति का मौका है, बिहार में जगह-जगह दही-चूड़ा भोज का आयोजन हुआ. ऐसे ही दही-चूड़ा के एक भोज ने बिहार की राजनीति में हलचल तेज कर दी. मौका था लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव के सरकारी आवास 26 एम, स्ट्रैंड रोड पर दही-चूड़ा भोज के आयोजन का. देखने में यह एक पारंपरिक पर्व का आयोजन था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे सामान्य कार्यक्रम नहीं माना गया. हर किसी की नजर इस बात पर थी कि क्या यह आयोजन तेजप्रताप यादव की नई राजनीतिक शुरुआत यानी पॉलिटिकल लॉन्चिंग का मंच बनने जा रहा है.

ये भी पढ़ें- Tej Pratap Yadav: काला चश्मा, काला मफलर.. तेज प्रताप के दही चूड़ा के न्योते पर सबसे पहले पहुंचे रूठे लालू यादव

तेजप्रताप ने NDA नेताओं को भी दया था न्योता

दरअसल, बीते कुछ समय से तेजप्रताप यादव की गतिविधियां यह संकेत दे रही थीं कि वे अपनी राजनीतिक भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करना चाहते हैं. यही वजह थी कि दही-चूड़ा भोज से पहले ये चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि तेजप्रताप इस आयोजन के जरिए यह दिखाने की कोशिश करेंगे कि उनकी स्वीकार्यता सिर्फ राजद तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एनडीए के नेताओं के साथ भी संवाद और संपर्क बनाने में सक्षम हैं.

PTI फोटो.

इन चर्चाओं को और हवा तब मिली, जब सामने आया कि तेजप्रताप यादव ने पिछले करीब 15 दिनों में खुद एनडीए के कई बड़े नेताओं से संपर्क किया. उन्होंने नेताओं को फोन कॉल, व्यक्तिगत मुलाकात और संदेशों के जरिए न्योता दिया. न्योता पाने वालों में बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, कई कैबिनेट मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति और अलग-अलग दलों के बड़े नेता शामिल थे. एक दर्जन से ज्यादा बड़े नामों को आमंत्रण दिया जाना अपने आप में बड़ा सियासी संकेत माना गया.

तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज में कौन-कौन पहुंचा?

लेकिन आयोजन के दिन तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आई. जिन बड़े नेताओं की मौजूदगी की उम्मीद थी, वे कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए. राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा, मंत्री अशोक चौधरी और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को छोड़ दें, तो ज्यादातर बड़े चेहरे इस भोज से दूर रहे. न मंत्रियों की भीड़ दिखी और न ही एनडीए के दिग्गज नेताओं की सक्रिय भागीदारी. डिजिटल और सियासी हलकों में इसे तेजप्रताप यादव के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.

तेज प्रताप के लिए क्या है राजनीतिक संदेश?

इस गैरहाजिरी के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं. पहला साफ संदेश यह माना जा रहा है कि एनडीए के नेता तेजप्रताप यादव के किसी भी संभावित अलग राजनीतिक प्रयोग से खुद को जोड़ने के मूड में नहीं हैं. दूसरा, यह भी चर्चा है कि तेजप्रताप यादव की स्थिति फिलहाल न तो उनकी अपनी पार्टी राजद में मजबूत है और न ही सत्ता पक्ष या विपक्ष के दूसरे खेमों में उन्हें लेकर कोई स्पष्ट राजनीतिक लाइन है. ऐसे में बड़े नेताओं ने दूरी बनाए रखना ही सुरक्षित समझा.

Advertisement

राजद के अंदरूनी हालात भी इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े हुए माने जा रहे हैं.  तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव के रिश्तों को लेकर पहले से ही तरह-तरह की अटकलें लगती रही हैं. पार्टी के भीतर तेजप्रताप की भूमिका सीमित होती दिख रही है, जबकि वे बाहर अपनी अलग पहचान और राजनीतिक स्पेस तलाशने की कोशिश में नजर आते हैं. दही-चूड़ा भोज को भी इसी कोशिश का हिस्सा माना गया था, लेकिन अपेक्षित समर्थन न मिलना उनके लिए एक बड़ा संकेत है.

टेकऑफ से पहले क्रैश

कुल मिलाकर, जिस आयोजन को तेजप्रताप यादव की सियासी उड़ान का टेकऑफ माना जा रहा था, वही आयोजन कई सवाल छोड़ गया. एनडीए नेताओं की गैरमौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि उनकी राजनीतिक उड़ान फिलहाल जमीन से ऊपर उठने में ही अटकी हुई है. राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह पूरा मामला टेकऑफ से पहले क्रैश जैसा है, जहां मंशा बड़ी थी, संदेश भी था, लेकिन सियासी हकीकत ने फिलहाल उन्हें आईना दिखा दिया. अब आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि तेजप्रताप यादव इस संकेत को कैसे समझते हैं और आगे अपनी राजनीति की दिशा किस तरफ मोड़ते हैं.
 

Advertisement
Featured Video Of The Day
Rao Inderjeet Yadav Interview: Elvish Yadav और Fazilpuria पर किसने कराई फायरिंग? | NDTV Exclusive