Bihar: विशाखापत्तनम में तैनात सूबेदार मेजर हरेराम गिरि का निधन, राजकीय सम्मान के साथ गंडक तट पर दी अंतिम विदाई

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा के रहने वाले भारतीय सेना के सूबेदार मेजर हरेराम गिरी का विशाखापट्टनम में ड्यूटी के दौरान निधन हो गया. मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव चंडी स्थान मलाही टोला पहुंचते ही पूरा इलाका शोक में डूब गया. पढ़िए बिंदेश्वर कुमार की ये रिपोर्ट.

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सूबेदार मेजर हरेराम गिरी
NDTV

West Champaran Army Jawan Demise News: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा से बेहद भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है, जहां भारतीय सेना के वीर जवान सूबेदार मेजर हरेराम गिरी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई. नगर थाना क्षेत्र के चंडी स्थान मलाही टोला निवासी हरेराम गिरी देश सेवा के दौरान विशाखापट्टनम में तैनात थे.  ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. मंगलवार को जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो पूरा इलाका शोक में डूब गया.  सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी और पूरे राजकीय सम्मान के साथ गंडक नदी तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया.

ड्यूटी के दौरान बिगड़ी तबीयत

भारतीय सेना में सूबेदार मेजर के पद पर तैनात हरेराम गिरी वर्तमान में विशाखापट्टनम में अपनी सेवाएं दे रहे थे. इसी दौरान अचानक उन्हें हार्ट अटैक आया और उनकी हालत गंभीर हो गई.  

 पार्थिव शरीर पहुंचते ही रो पड़ा पूरा गांव

मंगलवार को जैसे ही सूबेदार मेजर हरेराम गिरी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव चंडी स्थान मलाही टोला पहुंचा, पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो गया. परिजनों की चीख-पुकार सुन हर किसी की आंखें नम हो गईं. गांव के लोगों ने अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धांजलि दी.

राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

देश सेवा में अपना जीवन न्योछावर करने वाले सूबेदार मेजर हरेराम गिरी को गंडक नदी तट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. सेना के जवानों  के जरिए उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इस दौरान मौजूद लोगों ने भारत माता की जय जैसे नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की.

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1996 में सेना जॉइन की थी, 2028 में होने वाले थे रिटायर

परिजनों ने बताया कि हरेराम गिरी ने 28 फरवरी 1996 को बॉम्बे से भारतीय सेना में अपनी सेवा की शुरूआत की थी. करीब तीन दशक तक उन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण इलाकों जैसे मेरठ, लेह और जम्मू में अपनी सेवाएं दीं. वर्ष 2028 में उनका रिटायरमेंट होना तय था, लेकिन उससे पहले ही उनका निधन हो गया. वे अपने पीछे पत्नी, दो पुत्री और एक पुत्र छोड़ गए हैं. 

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