शिवेश राम को 30 तो तेजस्वी के उम्मीदवार को 37 वोट, फिर भी NDA की जीत कैसे? समझें राज्यसभा काउंटिंग का गणित

बिहार में राज्यसभा चुनाव की सभी 5 सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज कर ली है. एनडीए के उम्मीदवार शिवेश राम को 30 वोट मिले, जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र कुमार सिंह को 37 विधायकों ने वोट दिए. लेकिन इसके बाद भी शिवेश राम की जीत हुई. यह कैसे हुआ, समझें राज्यसभा चुनाव के काउंटिंग के नियम.

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राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करते एनडीए उम्मीदवार शिवेश राम और महागठबंधन उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह.
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  • बिहार में 5 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में NDA के सभी उम्मीदवारों ने विजयी होकर महागठबंधन को पराजित किया.
  • राज्यसभा चुनाव में विधायकों द्वारा वरीयता क्रम में वोट डालने की प्रक्रिया के कारण शिवेश को ट्रांसफर वोट मिले.
  • कुल 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में चार विधायकों के अनुपस्थित रहने से जीत के लिए आवश्यक कोटा 40 वोटों पर आ गया.
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पटना:

Bihar Rajya Sabha Election Result: बिहार में पांच सीटों पर हुए राज्यसभा चुनाव में सभी सीटें NDA के उम्मीदवारों ने जीत ली. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, RLM प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा के साथ-साथ पांचवें प्रत्याशी शिवेश राम को भी जीत मिली. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 44 विधायकों ने वोट किया, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को भी 44 विधायकों ने वोट किया. उपेन्द्र कुशवाहा को 42 और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को भी 42 विधायकों ने वोट किया. NDA के पांचवें उम्मीदवार शिवेश राम को सिर्फ 30 विधायकों ने वोट किया. RJD के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को 37 विधायकों ने वोट किया. विधायकों के ज्यादा वोट हासिल करने के बावजूद अमरेंद्र धारी सिंह चुनाव हार गए. 

इस वाकये ने 2016 में हरियाणा में हुए राज्यसभा चुनाव की याद दिला दी जब सबसे कम विधायकों के वोट पाने के बावजूद सुभाष चंद्रा राज्यसभा चुनाव जीत गए थे. 

वरीयता क्रम में डालना होता है राज्यसभा चुनाव का वोट

दरअसल, राज्यसभा चुनाव के लिए वरीयता क्रम में वोट डालना होता है. नीतीश कुमार, नितिन नबीन, रामनाथ ठाकुर, उपेंद्र कुशवाहा को वोट डालने वाले NDA के सभी विधायकों ने द्वितीय वरीयता का वोट शिवेश राम को दिया था. जीतने के लिए उम्मीदवार को वोट का तय कोटा हासिल करना होता है. 

राज्यसभा चुनाव में मिली जीत के बाद बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन को बधाई देते पार्टी नेता.

243 के हिसाब से 41 था जीत का कोटा, 4 MLA गायब रहे, घट कर 40 हुआ कोटा 

243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में 5 सीटों पर हो रहे चुनाव में जीत के लिए 41 विधायकों के वोट की आवश्यकता थी. लेकिन 4 विधायकों के अनुपस्थित होने के कारण कोटा घट कर 40 हो गया. यानी जिन उम्मीदवारों को 40 या इससे अधिक विधायकों ने वोट डाला, वे सभी चुनाव जीत गए. इस आधार पर नीतीश कुमार, नितिन नबीन, रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा चुनाव जीते. लेकिन शिवेश राम और अमरेंद्र धारी सिंह 40 का कोटा हासिल नहीं कर पाए, इसलिए प्रक्रिया आगे बढ़ी.

कोटा से अधिक मिले वोट दूसरे उम्मीदवार को हुए ट्रांसफर

नियमों के मुताबिक तय कोटे से अधिक वोट हासिल करने वाले कैंडिडेट के उतने वोट जो उन्होंने कोटे से अधिक हासिल किया है, वह उस उम्मीदवार को ट्रांसफर हो जाता है जिसे दूसरी वरीयता के वोट मिले हैं. जैसे नीतीश कुमार ने तय कोटा (40) से 4 वोट अधिक हासिल किए, तो उनके यह 4 वोट शिवेश राम को ट्रांसफर हो गए. क्योंकि नीतीश कुमार को वोट देने वाले सभी उम्मीदवारों ने शिवेश राम को द्वितीय वरीयता का वोट दिया था. 

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30 से 40 तक ऐसे पहुंचा शिवेश राम का वोट

इस तरह नीतीश कुमार के कोटे से 4, नितिन नबीन के कोटे से 4, रामनाथ ठाकुर के कोटे से 2 विधायकों का वोट पाते ही एनडीए के शिवेश राम को जीत से जरूरी 40 वोट मिल गए. इस तरह उन्होंने 37 वोट हासिल करने वाले अमरेंद्र धारी सिंह को चुनाव हरा दिया. 

वोटिंग के बाद विक्ट्री साइन दिखाते भाजपा नेता.

2016 में फर्स्ट प्रिफरेंस के कम वोट के बावजूद जीते थे सुभाष चंद्रा

2016 में हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में 14 विधायकों के वोट रद्द होने के कारण सुभाष चंद्रा को जीत मिली थी. हरियाणा में 90 विधायक हैं. भाजपा के बीरेन्द्र सिंह को 40 वोट मिले थे, कांग्रेस के आरके आनंद को 21 और सुभाष चंद्रा को 15 वोट मिले थे जबकि 14 विधायकों के वोट रद्द हो गए थे. ऐसे में उम्मीदवार जीतने के लिए सिर्फ 26 वोटों की आवश्यकता रह गई थी. इसलिए बीरेंद्र सिंह के 14 वोट सुभाष चंद्रा को ट्रांसफर हो गए क्योंकि इन सभी विधायकों ने दूसरी वरीयता का मत सुभाष चंद्रा को दिया था. इसलिए सुभाष चंद्रा चुनाव जीत गए.

एनडीए इस फॉर्मूला को ध्यान में रख कर पहले से तैयारी कर रहा है, जिस कारण आज बिहार में एनडीए ने एक बार फिर तेजस्वी की अनुआई वाले महागठबंधन को चित कर दिया और सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज की. राज्यसभा चुनाव में मिली हार के बाद तेजस्वी का दर्द भी झलका. उन्होंने कहा कि अगर हमारे विधायकों ने धोखा नहीं दिया होता तो जीत हमारी होती.

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